सरकार ने महंगाई को 4 प्रतिशत (दो प्रतिशत अंक अधिक या कम ) के दायरे में रखने के फैसले को कायम रखा है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार यह फैसला नए और पुराने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) श्रृंखलाओं में व्यापक निरंतरता को दर्शाता है।
केंद्र ने बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक के लिए कम या अधिक के दो प्रतिशत के बैंड के साथ 4 प्रतिशत महंगाई के लक्ष्य को अधिसूचित किया है। महंगाई का यह लक्ष्य 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 के लिए अधिसूचित किया गया है। यह कदम लगातार दूसरी समीक्षा को चिह्नित करता है। इसमें लचीले महंगाई लक्ष्यीकरण (एफआईटी) ढांचे के तहत मौजूदा लक्ष्य को बरकरार रखा गया है। एफआईटी ढांचा 1 अक्टूबर, 2016 से प्रभावी हुआ। इस ढांचे की हर पांच साल में समीक्षा होती है और इसे पिछली बार मार्च, 2021 में मार्च, 2026 तक की अवधि के लिए बरकरार रखा गया था।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, ‘फैसला दर्शाता है कि सरकार नई सीपीआई श्रृंखला समग्र महंगाई के आंकड़ों के मामले में पिछली श्रृंखला के अनुरूप मानती है। इसलिए कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं किया गया है।’ अर्थशास्त्रियों ने यह भी कहा कि ढांचे को बनाए रखने से मौद्रिक नीति में निरंतरता बनी रहती है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता ने कहा, ‘ढांचे को अपरिवर्तित रखना अच्छा कदम है। वर्तमान ढाँचा आरबीआई को आपूर्ति-पक्ष के झटकों से निपटने की मजबूती देता है।’ उन्होंने कहा कि +/- 2 प्रतिशत का बैंड केंद्रीय बैंक को विकास का समर्थन करते हुए आपूर्ति-पक्ष की बाधाओं को नजरअंदाज करने की अनुमति देता है। इस क्रम में 4 प्रतिशत का लक्ष्य यह तय करता है कि नीति प्रतिबंधात्मक नहीं हो।
यह समीक्षा ऐसे समय में आई है जब रिजर्व बैंक ने अगस्त 2025 में ढांचे के प्रमुख पहलुओं पर प्रतिक्रिया मांगते हुए चर्चा पत्र जारी किया था। इसमें 4 प्रतिशत लक्ष्य की उपयुक्तता, नीति को हेडलाइन या मुख्य मुद्रास्फीति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए या नहीं, और क्या सहनशीलता बैंड को बदला जाना चाहिए, जैसे प्रश्न शामिल थे। पत्र में इस बात पर भी विचार मांगा गया था कि क्या केंद्रीय बैंक को विशिष्ट संख्या का लक्ष्य रखना चाहिए या एक दायरे के साथ कायम रखना चाहिए।
भारत ने भारतीय रिजर्व बैंक 1934 के अधिनियम में संशोधन के बाद 2016 में लचीला महंगाई लक्ष्यीकरण ढांचा अपनाया था। इसमें मूल्य स्थिरता को मौद्रिक नीति का प्राथमिक उद्देश्य अनिवार्य किया और मौद्रिक नीति समिति की स्थापना की – एक और संस्थागत परिवर्तन – जो गवर्नर-केंद्रित मौद्रिक नीति से एमपीसी की स्थापना के साथ निर्णय लेने के सहयोगात्मक दृष्टिकोण की ओर बदलाव था।
दरअसल, मौद्रिक नीति समिति में छह सदस्य हैं। इनमें रिजर्व बैंक के तीन अधिकारी और तीन बाहरी सदस्य हैं। बाहरी सदस्यों की नियुक्ति सरकार करती है। मौद्रिक नीति की ब्याज दर मतदान के बहुमत से तय होती है और मत बराबर होने की स्थिति में गवर्नर का मत निर्णायक होता है। तीन उन्नत अर्थव्यवस्थाओं सहित विश्व के 26 देशों का महंगाई लक्ष्यीकरण ढांचे में सहनशीलता बैंड के साथ बिंदु लक्ष्य है। महंगाई लक्ष्यीकरण अपनाने वाले किसी भी प्रमुख देश ने इसे कभी नहीं छोड़ा है।
एफआईटी ढांचे में जवाबदेही तंत्र भी है। इसमें रिजर्व बैंक को महंगाई के लगातार तीन तिमाहियों तक सहनशीलता बैंड का उल्लंघन करने पर स्पष्टीकरण देने की जरूरत होती है। केंद्रीय बैंक ने समय के साथ अपनी विश्लेषणात्मक और संचार प्रक्रियाओं को मजबूत किया है। इसमें एमपीसी की बैठक का ब्योरा (मिनट्स), मतदान पैटर्न और मुद्रास्फीति अनुमानों को प्रकाशित करना शामिल है। यह पारदर्शिता और नीति विश्वसनीयता में सुधार के प्रयासों का हिस्सा है।