केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत मजदूरी मद के लिए पहली किस्त के रूप में 17,744.19 करोड़ रुपये जारी किए हैं ताकि मांग के आधार पर काम उपलब्ध कराने के साथ ही समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।
सूत्रों के अनुसार, इस योजना को नए ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन’(ग्रामीण) या वीबी-जी राम जी से बदलने की योजना है। उन्होंने बताया कि मजदूरी की राशि के अलावा, प्रशासनिक और सामग्रियों के मद के तहत अब तक 3,478 करोड़ रुपये राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जारी किए गए हैं।
मनरेगा रोजगार में लगभग 35.3 प्रतिशत की मासिक गिरावट के मुद्दे पर अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह योजना मांग आधारित है और रोजगार में उतार-चढ़ाव महीनों के हिसाब से बेहद सामान्य बात है।
इसके पीछे मौसम संबंधी कारण व स्थानीय आजीविका से जुड़े अवसर जैसे कई कारक काम करते हैं। अधिकारियों ने यह भी कहा कि इन बदलती मांगों के आधार पर पूंजी प्रवाह और श्रमिक बजट का समायोजन सही तरीके से किया गया है। सूत्रों ने बताया कि इस वर्ष अप्रैल के लिए लगभग 30 करोड़ व्यक्ति-दिन निर्धारित किए गए थे जबकि मई के लिए तय किया गया श्रमिक बजट 43 करोड़ व्यक्ति-दिन से अधिक था जो वित्त वर्ष की पहली छमाही में रोजगार में बढ़ोतरी को दर्शाता है।
केंद्र सरकार ने समीक्षा बैठकों और आधिकारिक संचारों के माध्यम से इसकी दोबारा पुष्टि की है कि मनरेगा तब तक जारी रहेगा, जब तक प्रस्तावित वीबी-जी राम जी योजना लागू नहीं हो जाती। केंद्रीय सरकार ने वित्त वर्ष 2027 के बजट में वीबी-जी राम जी योजना के लिए 95,692 करोड़ रुपये और मनरेगा के लिए 30,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, ताकि लंबित बकाये का भुगतान किया जा सके और इस बदलाव वाले वक्त के दौरान फंड की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।