मार्च महीने में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की शुद्ध प्राप्ति 8.2 फीसदी बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये रही। सरकारी आंकड़ों के अनुसार यह जीएसटी 2.0 व्यवस्था के तहत पिछले छह महीनों में सबसे मजबूत राजस्व वृद्धि है। हालांकि आंकड़े फरवरी के उत्पादन और उपभोग को दर्शाते हैं और इसमें पश्चिम एशिया में चल रहे संकट का प्रभाव नहीं दिखा है।
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में सकल जीएसटी संग्रह पिछले वर्ष की तुलना में 8.3 फीसदी बढ़कर 22.27 लाख करोड़ रुपये रहा जबकि शुद्ध जीएसटी राजस्व (उपकर को छोड़कर) 7.1 फीसदी बढ़कर 19.35 लाख करोड़ रुपये रहा। सितंबर 2025 में दरों में की गई कटौती के बावजूद जीएसटी संग्रह दमदार रहा।
आंकड़ों के हिसाब से देखें तो मार्च में जीएसटी राजस्व पिछले छह महीनों में सबसे अधिक रहा और इसने जनवरी के 1.70 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पीछे छोड़ दिया। वित्त वर्ष 2025-26 में यह अप्रैल के 2.09 लाख करोड़ रुपये के बाद दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। फरवरी में 1.61 लाख करोड़ रुपये की
प्राप्तियों की तुलना में मार्च में शुद्ध जीएसटी संग्रह में 10 फीसदी से अधिक की वृद्धि देखी गई। मार्च में सकल जीएसटी संग्रह 8.8 फीसदी बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये हो गया जो फरवरी के 1.83 लाख करोड़ रुपये से लगभग 9 फीसदी अधिक है। आयात से सकल राजस्व में 17.8 फीसदी की मजबूत वृद्धि हुई और यह 53,861 करोड़ रुपये रहा जबकि घरेलू लेनदेन से जीएसटी राजस्व 5.9 फीसदी बढ़कर 1.46 लाख करोड़ रुपये रहा।
मार्च महीने में कुल जीएसटी रिफंड 13.8 फीसदी बढ़कर 22,074 करोड़ रुपये रहा। घरेलू व्यापार में रिफंड 31.2 फीसदी बढ़ा जबकि आयात संबंधित रिफंड में 10.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
केंद्र सरकार ने 1 फरवरी, 2026 से क्षतिपूर्ति उपकर को बंद कर दिया है। ऐसे में मार्च में केवल पिछले महीनों में हुए लेनदेन पर क्षतिपूर्ति उपकर की शेष राशि का ही उल्लेख किया गया है। मार्च में शुद्ध उपकर संग्रह नगण्य (अस्थायी आंकड़ों के अनुसार 177 करोड़ रुपये) है जो इसके चरणबद्ध समाप्ति के अनुरूप है।
सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्रीय जीएसटी राजस्व का लक्ष्य (सीजीएसटी और क्षतिपूर्ति उपकर) 11.78 लाख करोड़ रुपये रखा था। खपत को बढ़ावा देने के लिए सितंबर 2025 में जीएसटी दरों में की गई कटौती के कारण 2026-27 के बजट के संशोधित अनुमान में केंद्रीय जीएसटी राजस्व का लक्ष्य घटाकर 10.46 लाख करोड़ कर दिया गया।