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GST Probe: 80 हजार करोड़ रुपये की कर मांग के लिए 20,000 से अधिक नोटिस जारी, आकलन वर्ष 2017-18 पर सबसे अधिक ध्यान

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जिन क्षेत्रों में नोटिस भेजा गया है उनमें विदेशी विमानन कंपनियां, जहाज कंपनियां, बीमा कंपनियां, ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां, IT कंपनियों समेत कई अन्य तरह की कंपनियां शामिल हैं।

Last Updated- August 21, 2024 | 9:17 PM IST
GST Probe: More than 20,000 notices issued for tax demand of Rs 80,000 crore, most focus on assessment year 2017-18 जीएसटी जांच: 80,000 करोड़ रुपये की कर मांग के लिए 20,000 से अधिक नोटिस जारी, आकलन वर्ष 2017-18 पर सबसे अधिक ध्यान

GST Probe: वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्राधिकरण की जांच शाखा ने आकलन वर्ष 2017-18 से 2021-22 के लिए देश भर में 20,000 से अधिक नोटिस जारी किए हैं। आरंभिक अनुमानों के मुताबिक इन नोटिस के जरिये 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक की कर मांग की गई है। कथित तौर पर पूरा कर भुगतान नहीं करने, इनपुट टैक्स क्रेडिट के उलटफेर, बड़ी संख्या में करदाताओं और कारोबारों को प्रभावित करने वाले कुछ कानूनी प्रावधानों की व्याख्या सहित कई मुद्दों के लिए ये नोटिस जारी किए गए हैं।

सबसे ज्यादा कारण बताओ नोटिस जारी आकलन वर्ष 2017-18 के लिए जारी किए गए हैं जिसके लिए आखिरी मियाद 5 अगस्त थी। जांच एजेंसी को पांच साल की समय सीमा खत्म होने से कम से कम छह माह पहले नोटिस जारी करना अनिवार्य था। नतीजतन, नोटिस 5 अगस्त से पहले भेजे गए और इनके बारे में अंतिम आदेश 5 फरवरी, 2025 तक आने की उम्मीद है।

मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने कहा, ‘इनमें प्री-जीएसटी नोटिस भी शामिल हैं, जो कंपनियों के जवाब के आधार पर जीएसटी नोटिस में तब्दील हो सकते हैं अथवा नहीं भी हो सकते हैं।’ उल्लेखनीय है कि आकलन वर्ष 2018-19 के लिए समयसीमा 30 जून, 2025 है। केंद्रीय जीएसटी अधिनियम की धारा 74 के तहत नोटिस जारी किए गए हैं, जिसमें सालाना वित्तीय विवरणों के साथ जीएसटी रिर्टन में बताए गए बिक्री के आंकड़े बेमेल रहने पर कारण पूछा गया है।

डेलॉयट के पार्टनर एमएस मणि ने कहा, ‘जीएसटी का कारण बताओ नोटिस ऑडिट और जांच दोनों के अनुसार कारोबारियों को जारी किया गया है, जिससे कारोबारियों को समयसीमा के भीतर जवाब देना होगा। इस तरह के जवाबों में पिछले आंकड़े, लेखा रिकाॅर्ड और अन्य कर आंकड़ों के साथ सामंजस्य तथा उचित जानकारियां देनी होंगी। इन सभी में कारोबारियों का काफी समय और प्रयास लगेगा।’

सीजीएसटी अधिनियम की धारा 74 में प्रावधान है कि धोखाधड़ी, इरादतन गलत जानकारी अथवा कर से बचने के लिए तथ्यों को छिपाने के कारण संभावित तौर पर कम भुगतान करने या भुगतान न करने अथवा गलती से वापस किए गए कर की वसूली के लिए संबंधित अधिकारी नोटिस जारी कर सकता है।

जिन क्षेत्रों में नोटिस भेजा गया है उनमें विदेशी विमानन कंपनियां, जहाज कंपनियां, बीमा कंपनियां, ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां, सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों समेत कई अन्य तरह की कंपनियां शामिल हैं। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड ने कई बार हस्तक्षेप कर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) नोटिस के साथ ही ऑडिट कराने में एकरूपता को बढ़ावा देने के लिए भी दिशानिर्देश जारी किए हैं। दिशानिर्देश के मुताबिक क्षेत्रीय मुख्य आयुक्त व्याख्या संबंधी चुनौतियों का सामना करते वक्त जीएसटी नीति के जानकारों से परामर्श ले सकते हैं।

ईवाई में टैक्स पार्टनर सौरभ अग्रवाल ने कहा, ‘इस कवायद का मकसद ऑडिट निष्कर्षों में विसंगतियों को दूर करना, मुकदमेबाजी में कमी लाना और समग्र ऑडिट प्रक्रिया को सुव्यवस्थित कर अधिक पूर्वानुमानित कारोबारी वातावरण बनाना है। मानक वाले व्याख्या पर केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड का जोर देना मजबूत जीएसटी अनुपालन सुनिश्चित करते हुए निष्पक्ष व्यापार प्रथाओं के प्रति उसकी प्रतिबद्धता दर्शाता है।’

हालांकि, अधिकतर नोटिस इनपुट टैक्स क्रेडिट में फर्जीवाड़े के लिए जारी किए गए हैं। इस समस्या से निपटने के लिए विभाग ने फर्जी पंजीकरण खत्म करने के लिए खास तौर पर अभियान चलाया है। अब तक करीब 1.2 लाख करोड़ रुपये की कर चोरी पकड़ी गई है। सत्यापन के लिए 59 हजार कंपनियों की पहचान की गई है ताकि यह पता लगाए जा सके कि वे फर्जी हैं या सही हैं।

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First Published - August 21, 2024 | 9:17 PM IST

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