उत्पादन और बिक्री में वृद्धि के कारण अप्रैल में निजी क्षेत्र की गतिविधियों में सुधार होने की उम्मीद है। पश्चिम एशिया संकट से जुड़ी बाधाओं के कारण मार्च में गतिविधियां 3 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई थीं।
एसऐंडपी ग्लोबल द्वारा संकलित एचएसबीसी का फ्लैश इंडिया कंपोजिट परचेजिंग मैनेजर्स आउटपुट इंडेक्स (पीएमआई) मार्च के 57 अंक से बढ़कर 58.3 हो गया है। यह सूचकांक लगातार 57 महीनों से 50 के ऊपर है, जो वृद्धि और संकुचन के बीच का अंतर बताता है। फ्लैश पीएमआई किसी महीने के अंतिम विनिर्माण, सेवा और समग्र पीएमआई आंकड़ों का शुरुआती संकेत है, जो आमतौर पर अंतिम पीएमआई सूचकांकों के जारी होने से एक सप्ताह पहले जारी किया जाता है।
फ्लैश पीएमआई आम तौर पर हर महीने प्राप्त कुल पीएमआई सर्वे की प्रतिक्रियाओं का लगभग 90 प्रतिशत के आधार पर होता है और अंतिम प्रकाशन में सभी प्रतिक्रियाओं का उपयोग किया जाता है। एसऐंडपी द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन और बिक्री की वृद्धि दर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, लेकिन मूल्य का दबाव बढ़ गया है।’
विज्ञप्ति के अनुसार सर्वे में शामिल कंपनियों ने कहा कि क्षमता विस्तार, बेहतर मांग की स्थिति, नए काम के बढ़ते स्तर और तकनीकी निवेश ने व्यावसायिक गतिविधियों का समर्थन किया।
एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, ‘पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से जुड़ी बाधाओं के बीच मार्च में नरमी के बाद निजी क्षेत्र की गतिविधि में तेजी आई। विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन और नए ऑर्डर में तेज वृद्धि ने तेजी का नेतृत्व किया। सर्वे से संकेत मिलता है कि कंपनियां आपूर्ति की ओर से झटके की अवधि के आसपास की अनिश्चितताओं को प्रबंधित करने के लिए बफर स्टॉक बना रही हैं।’
एचएसबीसी फ्लैश इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई अप्रैल में मार्च के अंतिम 53.9 अंक से बढ़कर 55.9 हो गया, जो लगभग 4 साल का निम्नतम स्तर था। एचएसबीसी फ्लैश इंडिया सर्विसेज पीएमआई बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स भी मार्च के अंतिम 57.5 अंक से थोड़ा बढ़कर 57.9 हो गया है।