facebookmetapixel
रेट कट का असर! बैंकिंग, ऑटो और रियल एस्टेट शेयरों में ताबड़तोड़ खरीदारीTest Post कैश हुआ आउट ऑफ फैशन! अक्टूबर में UPI से हुआ अब तक का सबसे बड़ा लेनदेनChhattisgarh Liquor Scam: पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को ED ने किया गिरफ्तारFD में निवेश का प्लान? इन 12 बैंकों में मिल रहा 8.5% तक ब्याज; जानिए जुलाई 2025 के नए TDS नियमबाबा रामदेव की कंपनी ने बाजार में मचाई हलचल, 7 दिन में 17% चढ़ा शेयर; मिल रहे हैं 2 फ्री शेयरIndian Hotels share: Q1 में 19% बढ़ा मुनाफा, शेयर 2% चढ़ा; निवेश को लेकर ब्रोकरेज की क्या है राय?Reliance ने होम अप्लायंसेस कंपनी Kelvinator को खरीदा, सौदे की रकम का खुलासा नहींITR Filing 2025: ऑनलाइन ITR-2 फॉर्म जारी, प्री-फिल्ड डेटा के साथ उपलब्ध; जानें कौन कर सकता है फाइलWipro Share Price: Q1 रिजल्ट से बाजार खुश, लेकिन ब्रोकरेज सतर्क; क्या Wipro में निवेश सही रहेगा?Air India Plane Crash: कैप्टन ने ही बंद की फ्यूल सप्लाई? वॉयस रिकॉर्डिंग से हुआ खुलासा

बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं से मांग, देश के निर्यात पर असर पड़ सकता है: FIEO

निर्यात 2023-24 में 3.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ 437 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। आयात भी आठ प्रतिशत से अधिक घटकर 677.24 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।

Last Updated- April 29, 2024 | 3:25 PM IST
GTRI
Representative Image

निर्यातकों के शीर्ष संगठन फियो ने कहा है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव का असर वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही में देश के निर्यात पर पड़ सकता है क्योंकि इससे वैश्विक मांग प्रभावित होने की आशंका है।

निर्यातकों के शीर्ष संगठन फियो ने यह बात कही। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के कारण उत्पन्न वैश्विक अनिश्चितताओं ने वित्त वर्ष 2023-24 में भारत के निर्यात को प्रभावित किया था। निर्यात 2023-24 में 3.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ 437 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। आयात भी आठ प्रतिशत से अधिक घटकर 677.24 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।

भारतीय निर्यातक संगठनों के महासंघ (फियो) के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा, ‘‘अगर वैश्विक स्थिति ऐसी ही बनी रही तो इसका असर वैश्विक मांग पर पड़ेगा। पहली तिमाही के आंकड़ों में मांग में सुस्ती दिख सकती है।’’ उन्होंने कहा कि तमाम चुनौतियों के बावजूद माल ढुलाई दरों में नरमी आ रही है। यह संकेत देता है कि आने वाले समय में मांग पर असर पड़ सकता है। सहाय ने आगाह किया कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के और बढ़ने से विश्व व्यापार पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के अलावा उच्च मुद्रास्फीति और उच्च ब्याज दर भी मांग में नरमी के महत्वपूर्ण कारक हैं।’’ महानिदेशक ने कहा कि यूरोप जैसी कुछ उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में और अधिक नरमी देखी जा सकती है। साथ ही उन्होंने कहा कि 2023-24 के दौरान भारत की घरेलू मुद्रा में चीनी युआन के 4.8 प्रतिशत के मुकाबले केवल 1.3 प्रतिशत की गिरावट आई। थाईलैंड मुद्रा 6.3 प्रतिशत और मलेशियाई रिंगिट सात प्रतिशत की गिरावट आई। इजराइल-ईरान युद्ध के प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग क्षेत्र के कुछ निर्यातकों ने कहा है कि संयुक्त अरब अमीरात और फिर ईरान जाने वाले सामानों की मांग कम हो गई है। आभूषणों की मांग में भी कमी आ सकती है।

फियो के महानिदेशक ने सरकार को नकदी के मोर्चे पर निर्यातकों के लिए कुछ कदम उठाने का सुझाव दिया। सहाय ने कहा, ‘‘ मांग में कमी के कारण, माल का उठाव कम होगा इसलिए विदेशी खरीदारों को भुगतान करने में भी समय लगेगा। हमें लंबी अवधि के लिए कोष की आवश्यकता है। निर्यातकों को भी ब्याज छूट की जरूरत है।’’

उन्होंने ब्याज समानीकरण योजना (आईईएस) को जारी रखने का सुझाव दिया। योजना के तहत पात्र निर्यातकों को निर्यात से पहले और बाद में कर्ज की सुविधा मिलती है। इसके अंतर्गत बैंकों को पात्र निर्यातकों को कर्ज उपलब्ध कराने की अनुमति है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने योजना को 30 जून तक जारी रखने के लिए 2,500 करोड़ रुपये के अतिरिक्त आवंटन को आठ दिसंबर 2023 को मंजूरी दी थी।

First Published - April 29, 2024 | 3:25 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट