कृषि और इससे जुड़ी गतिविधियों का वित्त वर्ष 26 में सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) 3 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। रबी की अच्छी फसल हुई है। इसलिए यह दूसरे अग्रिम अनुमान 2.4 प्रतिशत से कुछ बेहतर है। हालांकि यह अनुमान वित्त वर्ष 25 के अनुमान 4.2 प्रतिशत से महत्त्वपूर्ण रूप से कम है। जीवीए के अनंतिम अनुमान आज जारी हुए।
मौजूदा मूल्यों पर क्षेत्र के जीवीए में जबरदस्त गिरावट हुई है। इसके कारण वित्त वर्ष 26 में जीवीए में गिरावट आई है। मौजूदा मूल्यों पर कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों का जीवीए वित्त वर्ष 25 के 9.2 प्रतिशत से कम महंगाई के कारण गिरकर वित्त वर्ष 26 में महज 1.4 प्रतिशत पर आ गया। मौजूदा कीमतों में गिरावट नकारात्मक मुद्रास्फीति के कारण हुई है। इसका व्यापक स्तर किसानों की कमाई पर प्रभाव पड़ सकता है।
आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों के लिए स्थिर कीमतों पर जीडीपी वृद्धि अनुमानित 3.6 प्रतिशत थी और यह तीसरी तिमाही की 1.7 प्रतिशत से अधिक थी। हालांकि यह मौजूदा कीमतों पर तीसरी तिमाही में नकारात्मक 0.5 प्रतिशत से बढ़कर 2.8 प्रतिशत हो गई।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, ‘27 फरवरी को जारी किए गए दूसरे उन्नत अनुमान में कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए जीवीए को 2.4 प्रतिशत आंका गया था लेकिन प्रारंभिक अनुमानों में इसे 3 प्रतिशत तक संशोधित किया गया है। इसका मतलब है कि वित्त वर्ष 26 के आंकड़ों में रबी की फसल के प्रभाव को ध्यान में रखा गया है।’
हालांकि आने वाले समय में यदि अल नीनो मॉनसून के प्रतिकूल प्रभाव के कारण कृषि उत्पादन में बड़ी गिरावट आती है तो वित्त वर्ष 27 और इसकी पहली तिमाही में कृषि वृद्धि दबाव में आ सकती है। दरअसल, 4 जून को केरल पर तीन दिन की देरी के बाद दक्षिण पश्चिम मॉनसून आ गया है लेकिन कई विशेषज्ञों ने कहा कि अल नीनो के प्रभाव के कारण मॉनसून के अगले चार महीनों में इसकी प्रगति और प्रसार दबाव में आ सकता है।
भारत के मौसम विभाग ने अल नीनो के कारण 2026 के मॉनसून के पूर्वानुमान को अप्रैल में अनुमानित 92 प्रतिशत से घटाकर दीर्घकालिक औसत का 90 प्रतिशत कर दिया है। यदि वास्तविक बारिश पूर्वानुमान के करीब रहती है तो 2026 का दक्षिण पश्चिम मॉनसून एक दशक से भी अधिक समय में सबसे ज्यादा सूखा हो सकता है।