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भारत-कोरिया के बीच हुआ ‘वॉयजेस’ समझौता: अब चीन पर नहीं रहेगी निर्भरता, देश में ही बनेंगी हाई-टेक क्रेनें

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भारत और दक्षिण कोरिया ने 'वॉयजेस' समझौते के जरिए शिपबिल्डिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में सहयोग बढ़ाने, चीन पर निर्भरता घटाने और हरित तकनीक में निवेश का बड़ा फैसला लिया है

Last Updated- April 21, 2026 | 11:07 PM IST
South Korean President Lee Jae Myung
सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में संयुक्त प्रेस बयान के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग | फोटो: PTI

भारत ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यांग के नेतृत्व में आए कोरियाई प्रतिनिधिमंडल से कहा है कि उनके पोत निर्माता भारत के तेजी से बढ़ रहे नाविकों को काम पर रख सकते हैं, अपने पोतों को भारत में पंजीकृत कर सकते हैं तथा महाराष्ट्र के वधावन कंटेनर पोर्ट, ओडिशा के बाहुदा बहुउद्देश्यीय टर्मिनल और गुजरात के दीनदयाल पोर्ट सहित अन्य जगहों पर अधोसंरचना विकास में भी योगदान कर सकते हैं।

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की तीन दिवसीय भारत यात्रा मंगलवार को समाप्त हुई। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा को अहम क्षेत्रों में ठोस परिणाम देने वाली बताया। ली की भारत यात्रा की सबसे रेखांकित करने वाली बात थी ‘’शेयर्ड विजन फॉर ऑपरेशन ऑफ यार्ड असिस्टेड ग्रोथ विद इफीशिएंसी ऐंड स्केल’ (वॉयजेस) समझौते की घोषणा।

भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल), एचडी कोरिया शिपबिल्डिंग ऐंड ऑफशोर इंजीनियरिंग (एचडी केएसओई) और एचडी ह्युंडै सामहो कंपनी लिमिटेड के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके तहत भारत में अगली पीढ़ी के पारंपरिक और स्वायत्त समुद्री तथा पोर्ट क्रेनों को संयुक्त रूप से डिजाइन और निर्माण किया जाएगा। वर्तमान में भारत की पोर्ट क्रेनों के लिए चीन पर निर्भरता 90 प्रतिशत से अधिक है।

भारत में सहायक उद्योगों के निर्माण में मदद करने के लिए, कोरियाई शिपबिल्डिंग उपकरण निर्माताओं का संघ आने वाले कुछ महीनों में भारत में अपना कार्यालय स्थापित करेगा। सूत्रों के मुताबिक अमेरिका और चीन के बीच भू-राजनीतिक तनाव ने दक्षिण कोरियाई शिपबिल्डरों के लिए अवसर पैदा किए हैं, क्योंकि कुछ पश्चिमी शिपिंग कंपनियां राजनीतिक जोखिम को कम करने के लिए चीन से ऑर्डर हटाकर उनकी ओर रुख कर रही हैं।

अक्टूबर 2025 में हुए अमेरिका-दक्षिण कोरिया व्यापार समझौते में शिपबिल्डिंग सहयोग के लिए 150 अरब डॉलर की राशि शामिल थी। भारत-दक्षिण कोरिया ‘वॉयजेस’ समझौता शिपबिल्डिंग से संबंधित दूसरा ऐसा सहयोगी प्रबंध है, जिसमें दक्षिण कोरिया ने किसी अन्य देश के साथ भागीदारी की है।

कम मार्जिन वाले बल्कर्स और मानक कंटेनरों में चीन की बेहतरी के बावजूद, कोरियाई शिपयार्ड उच्च मूल्य वाले खंडों जैसे तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) कैरियर्स, ड्यूल फ्यूल कंटेनर शिप्स, अल्ट्रा लार्ज कंटेनर शिप्स और उन्नत ऑफशोर प्लेटफॉर्म में मजबूत बने हुए हैं। वर्तमान में वैश्विक स्तर पर परिचालित 760 एलएनजी कैरियर्स में से लगभग 70 प्रतिशत कोरिया में बनाए गए हैं। कोरिया के शीर्ष तीन शिपबिल्डर्स (एचडी कोरिया शिपबिल्डिंग ऐंड ऑफशोर एनर्जी, हनव्हा ओशन और सैमसंग हेवी इंडस्ट्रीज का वैश्विक एलएनजी कंटेनरों के उत्पादन में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा है।

वॉयजेस समझौते के हिस्से के रूप में, भारतीय पक्ष ने दक्षिण कोरियाई पोत मालिकों को गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी इंटरनैशनल फाइनैंशियल सर्विसेज सेंटर (गिफ्ट आईएफएससी) और ई-समुद्र का उपयोग करके भारत में जहाजों को पंजीकृत करने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि वे उदार स्वामित्व संरचनाओं और उपलब्ध वित्तीय प्रोत्साहनों का लाभ उठा सकें।

सोमवार को हैदराबाद हाउस में दोनों प्रतिनिधिमंडलों के बीच हुई चर्चाओं के दौरान, भारतीय पक्ष ने यह भी उल्लेख किया कि भारत का तेजी से बढ़ता नाविक समूह (3.20 लाख से अधिक जिनमें महिला नाविक अच्छी खासी संख्या में शामिल हैं) कोरियाई जहाज-मालिकों को कर्मियों की भर्ती करने की अनुमति देता है। भारत ने भारत मैरीटाइम वीक 2025 के दौरान केवल सार्वजनिक एजेंसियों द्वारा ही भविष्य में 400 से अधिक जहाजों की अधिग्रहण योजना की घोषणा की है, जिसकी कुल कीमत 2.2 लाख करोड़ रुपये (25 अरब डॉलर) है।

इस क्षेत्र में सहयोग के हिस्से के रूप में, कोरिया मरीन इक्विपमेंट एसोसिएशन (केओएमईए) ने मुंबई में एक शाखा खोली है और कोरिया मरीन इक्विपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट (केओएमईआरआई) ने संबंधित सहयोग में रुचि दिखाई है। कोरिया इंटरनैशनल कोऑपरेशन एजेंसी (केओआईसीए) कौशल विकास प्रदान करेगी। दोनों देशों ने पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के तहत एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।

यह गत वर्ष जापान के बाद भारत द्वारा किसी विकसित अर्थव्यवस्था के साथ किया गया दूसरा ऐसा समझौता है। यह समझौता भारत में उभरती हरित प्रौद्योगिकियों में दक्षिण कोरिया से अंतरराष्ट्रीय जलवायु वित्त और निवेश को खोलने में मदद करेगा। यह भारत को उच्च-ईमानदारी वाले कार्बन क्रेडिट (आईटीएमओ) उत्पन्न करने और व्यापार करने के लिए एक औपचारिक ढांचा प्रदान करेगा।

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First Published - April 21, 2026 | 10:42 PM IST

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