देश में ऊर्जा आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने रविवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत सुपरियर केरोसिन ऑयल (SKO) का तदर्थ आवंटन मंजूर किया है। यह केरोसिन घरों में खाना बनाने और रोशनी के लिए दिया जाएगा। यह फैसला पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए लिया गया है।
सरकार ने यह भी बताया कि PDS के तहत पहले से केरोसिन मुक्त माने जाने वाले 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी इस व्यवस्था में शामिल किया गया है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद रहने की स्थिति को देखते हुए देश में पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की उपलब्धता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सरकारी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। देश में पेट्रोल और डीजल का भी पर्याप्त स्टॉक बताया गया है। घरेलू एलपीजी उत्पादन को भी बढ़ाया गया है ताकि मांग पूरी की जा सके।
28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने नॉन-डोमेस्टिक एलपीजी के वितरण के लिए सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार आदेश जारी किए हैं। बाकी क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध करा रही हैं। 14 मार्च 2026 के बाद से अब तक करीब 39,368 मीट्रिक टन एलपीजी कमर्शियल उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जा चुका है।
इसके अलावा, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नियमित आवंटन के अतिरिक्त 48,000 किलोलीटर केरोसिन दिया गया है। राज्यों से कहा गया है कि वे जिलों में वितरण के लिए उपयुक्त स्थान चिन्हित करें।
17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने SKO आवंटन के आदेश जारी किए हैं। वहीं हिमाचल प्रदेश और लद्दाख ने बताया है कि उन्हें केरोसिन की आवश्यकता नहीं है।
सरकार ने यह भी कहा कि कुछ जगहों पर अफवाहों के कारण लोगों ने पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगाई और जरूरत से ज्यादा खरीदारी की। हालांकि, देशभर में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार मौजूद है और किसी तरह की कमी नहीं है।
सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें। साथ ही सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा गया है कि वे रोजाना प्रेस ब्रीफिंग और सोशल मीडिया के जरिए सही जानकारी साझा करें ताकि गलत जानकारी को रोका जा सके। वर्तमान में 14 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस तरह की नियमित जानकारी दे रहे हैं।