यदि वित्त मंत्रालय व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) की लंबित सभी एंटी-डंपिंग शुल्क संबंधी सिफारिशों को लागू करता है तो भारत सालाना 3 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा की बचत कर सकता है। यह जानकारी सेंटर फॉर डोमेस्टिक इकॉनमी पॉलिसी रिसर्च (सी-डीईपी) और सेंटर फॉर डब्ल्यूटीओ स्टडीज (सीडब्ल्यूएस) की रिपोर्ट में दी गई है।
‘भारत में एंटी-डंपिंग शुल्क का प्रभाव’ शीर्षक वाली रिपोर्ट मंगलवार को जारी हुई। इसमें कहा गया, ‘डीजीटीआर की लंबित एंटी-डंपिंग शुल्क संबंधी सिफारिशों को लागू करने से सालाना लगभग 28,540 करोड़ रुपये (3 अरब अमेरिकी डॉलर) की विदेशी मुद्रा बचत होने का अनुमान है।’
वित्त मंत्रालय को भेजे गए ईमेल प्रश्न का खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं मिला। 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने से पहले भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728.49 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर से 5 प्रतिशत से अधिक घट गया है। ऐसी स्थिति में यह सिफारिश महत्त्वपूर्ण हो जाती है।
रिपोर्ट में कहा गया कि डीजीटीआर ने 56 उत्पादों पर एंटी-डंपिंग शुल्क लागू करने की सिफारिश की थी। इनके लागू नहीं होने से घरेलू उद्योग को प्रति वर्ष 11,938 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘भारत ने 2020 तक डीजीटीआर की लगभग 99.5 प्रतिशत एंटी-डंपिंग शुल्क संबंधी सिफारिशों को लागू किया था लेकिन उसके बाद कुछ अवधियों में अस्वीकृति और लागू न होने की दर में तेजी से वृद्धि हुई है।’ इसमें यह भी कहा गया है, ‘इसी अवधि के दौरान कई औद्योगिक क्षेत्रों में चीन से आयात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।’