facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

भारत को प्रति व्यक्ति उच्च कार्बन उत्सर्जन वाले देशों के साथ नहीं जोड़ा जा सकता: यूरोपीय संसद सदस्य

Advertisement

प्रति व्यक्ति उत्सर्जन कम होने के बावजूद जलवायु शिखर सम्मेलन में भारत को अमेरिका जैसे प्रमुख उत्सर्जकों के साथ जोड़ने के ठोस प्रयास किए गए हैं।

Last Updated- December 09, 2023 | 12:00 PM IST
Carbon emission
Representative Image

यूरोपीय संसद के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को कहा कि भारत का प्रतिव्यक्ति कार्बन उत्सर्जन “बेहद कम” है, ऐसे में इसे चीन और अमेरिका जैसे देशों से जोड़ना पूरी तरह से अस्वीकार्य है।

जर्मनी के नेता और यूरोपीय संसद के सदस्य पीटर लीसे ने यहां संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन में ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, “जब जर्मनी में लोगों के पास दो कार हैं, तो भारतीय लोगों के पास भी एक कार तो होनी ही चाहिए।” प्रति व्यक्ति उत्सर्जन कम होने के बावजूद जलवायु शिखर सम्मेलन में भारत को अमेरिका जैसे प्रमुख उत्सर्जकों के साथ जोड़ने के ठोस प्रयास किए गए हैं।

लीसे ने कहा, “हर किसी के लिए यह स्वीकार करना बहुत महत्वपूर्ण है कि संयुक्त अरब अमीरात, चीन और अमेरिका का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन… वे भारत से बहुत अलग हैं। यूरोप में कई लोग चीन और भारत को और कभी-कभी खाड़ी देशों को एक ही नजर से देखते हैं, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है। इन देशों की तुलना में भारत में प्रति व्यक्ति उत्सर्जन बहुत कम है।”

इस सप्ताह की शुरुआत में वैज्ञानिकों की एक वैश्विक टीम द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रति व्यक्ति कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन पिछले साल लगभग पांच प्रतिशत बढ़कर 2 टन कार्बन डाइऑक्साइड तक पहुंच गया, लेकिन यह अब भी वैश्विक औसत के आधे से भी कम है।

वैज्ञानिकों ने कहा कि अमेरिका प्रति व्यक्ति उत्सर्जन चार्ट में शीर्ष पर है, जहां देश का प्रत्येक व्यक्ति 14.9 टन सीओ2 उत्सर्जित करता है। इसके बाद रूस (11.4), जापान (8.5), चीन (8), और यूरोपीय संघ (6.2) हैं। वैश्विक औसत 4.7 टन रहा है।

Advertisement
First Published - December 9, 2023 | 12:00 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement