भारत का वित्त वर्ष 2026 में कर्ज-जीडीपी अनुपात बढ़कर लगभग 57.85 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। सरकार ने बजट के दौरान इसके 56.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। इसका मुख्य कारण यह है कि राष्ट्रीय आय के नए अस्थायी आंकड़ों के अनुसार नामिनल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) अनुमान से कम रहा।
भारत का वित्त वर्ष 2026 में कर्ज-जीडीपी अनुपात बढ़कर लगभग 57.85 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। यह सरकार के बजट अनुमान 56.1 प्रतिशत से अधिक है। इसका मुख्य कारण यह है कि राष्ट्रीय आय के नए अस्थायी आंकड़ों के अनुसार नॉमिनल जीडीपी अनुमान से कम रहा। इस बढ़ोतरी के कारण केंद्र सरकार का कर्ज घटाने का लक्ष्य और कठिन हो गया है, जिसे वित्त वर्ष 2031 तक 50 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखा गया है।
अब इस लक्ष्य को पाने के लिए अगले पांच वर्षों में लगभग 8 प्रतिशत अंक की कमी करनी होगी, जो पहले के अनुमान से करीब 2 प्रतिशत अंक अधिक चुनौतीपूर्ण है। हालांकि, सरकार ने वित्त वर्ष 2026 के राजकोषीय घाटा लक्ष्य पूरा कर लिया है जिसके लिए कुल खर्च में लगभग 60,000 करोड़ रुपये की कटौती की गई।
आंकड़ों के अनुसार, भारत की नॉमिनल जीडीपी वित्त वर्ष 2026 में 8.9 प्रतिशत बढ़कर 346.36 लाख करोड़ रुपये रही। यह आंकड़े सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी किए गए। वित्त वर्ष 2027 के बजट को जीडीपी आधार वर्ष संशोधन से पहले तैयार किया गया था और इसमें सरकार ने अनुमान लगाया था कि नॉमिनल जीडीपी 357.14 लाख करोड़ रुपये होगी और उसी आधार पर राजकोषीय घाटे और कर्ज का आकलन किया गया था।
अब नए जीडीपी अनुमान के बाद वित्त वर्ष 2027 के वित्तीय गणित पर भी असर पड़ सकता है क्योंकि सरकार ने वित्त वर्ष 2027 के लिए 393 लाख करोड़ रुपये के नॉमिनल जीडीपी का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए वित्त वर्ष 2027 में लगभग 13.5 प्रतिशत की वृद्धि जरूरी होगी। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में नॉमिनल जीडीपी वृद्धि 12 प्रतिशत से अधिक रह सकता है।