केंद्र सरकार ने मंगलवार को एक बड़ा फैसला लिया। सरकार ने अब उन सभी देशों से आने वाले विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के नियमों को आसान कर दिया है, जिनके साथ भारत की जमीन पर सीमा लगती है। इसमें चीन भी शामिल है। सरकारी सूत्रों ने यह बात बताई।
यह बदलाव प्रेस नोट 3 ऑफ 2020 में किया गया संशोधन है। फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में हुआ। अब तक इन देशों के निवेशकों को भारत में कहीं भी पैसा लगाने के लिए सरकार से पहले मंजूरी लेनी पड़ती थी।
बता दें कि चीन के अलावा बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान अपनी सीमा भारत के साथ साझा करते हैं।
चीन से भारत में FDI का हिस्सा काफी छोटा है। अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 तक कुल FDI में चीन का योगदान सिर्फ 0.32 फीसदी रहा, यानी महज 2.51 अरब डॉलर।
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दोनों देशों के रिश्ते जून 2020 में गलवान घाटी में हुई भयंकर झड़प के बाद बिगड़ गए थे।यह कई दशकों में सबसे बड़ा सैन्य टकराव था। इसके बाद भारत ने टिकटॉक, वीचैट और यूसी ब्राउजर समेत 200 से ज्यादा चीनी ऐप्स पर रोक लगा दी थी।
FDI भले कम हो, लेकिन दोनों के बीच व्यापार तेजी से बढ़ रहा है। चीन अब भारत का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है। 2024-25 में भारत का चीन को निर्यात 14.5 फीसदी घटकर 14.25 अरब डॉलर रह गया, जबकि पहले साल में यह 16.66 अरब था। उधर आयात 11.52 फीसदी बढ़कर 113.45 अरब डॉलर हो गया। नतीजा, व्यापार घाटा 85 अरब से बढ़कर 99.2 अरब डॉलर पहुंच गया। अप्रैल से जनवरी 2025-26 के दौरान निर्यात 38.37 फीसदी उछलकर 15.88 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 13.82 फीसदी बढ़कर 108.18 अरब डॉलर रहा। इस बीच घाटा 92.3 अरब डॉलर पर पहुंचा।
(PTI के इनपुट के साथ)