भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौता 2027 में लागू होने की संभावना है। भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत हरवे डेल्फिन ने गुरुवार को यह बात कही। डेल्फिन ने कहा कि दोनों पक्ष फिलहाल समझौते के मसौदे से जुड़े कानूनी पहलूओं पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने फेडरेशन ऑफ यूरोपियन बिजनेस इन इंडिया (एफईबीआई) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, ‘फिलहाल दोनों पक्षों की तरफ से समझौते के मसौदे को उचित कानूनी शक्ल देने के लिए समीक्षा हो रही है। हमें उम्मीद है कि समीक्षा के बाद सब कुछ सुचारू रूप से चलेगा। ब्रसेल्स में इस मुक्त व्यापार समझौते को मिले व्यापक राजनीतिक समर्थन को देखते हुए इसके 2027 में लागू होने की संभावना है।’
एक भारतीय अधिकारी ने बताया कि कानूनी समीक्षा इस साल जुलाई तक पूरी होने की उम्मीद है। डेल्फिन ने कहा कि दोनों पक्षों को यह सुनिश्चित करना होगा कि समझौते का सुचारू रूप से और सद्भावनापूर्वक क्रियान्वयन हो।
उन्होंने कहा,‘सीमा शुल्क प्रक्रियाओं या अनुपालन आवश्यकताओं का उद्देश्य पूरा होना चाहिए न कि उन्हें व्यापार में रुकावट के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। अगर प्रशासनिक प्रक्रियाएं कारोबार के लिए बहुत बोझिल हो जाती हैं और ऐसा लगने लगे कि अनुपालन की लागत तरजीही शुल्कों के लाभों से कहीं अधिक है तो यह अफसोसनाक स्थिति होगी।’
डेल्फिन ने कहा कि दोनों पक्षों को व्यापार करना अधिक आसान बनाने के प्रयास जारी रखने चाहिए। उन्होंने कहा,‘निश्चित रूप से यूरोपीय संघ की तरफ से हम भारत में चल रहे क्यूसीओ (गुणवत्ता नियंत्रण आदेश) प्रणाली में सुधार और उसकी मीक्षा का स्वागत करते हैं और भारत के गैर-वित्तीय नियामक सुधार पर उच्च स्तरीय समिति द्वारा की गई सिफारिश के अनुरूप इस क्षेत्र में आगे कार्रवाई की उम्मीद करते हैं।’
उन्होंने वार्ता के बाद एफटीए के मसौदे में गैर-सेवा क्षेत्रों में निवेश उदारीकरण से संबंधित प्रावधान के न होने की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा,‘इससे निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलता। उम्मीद है कि यूरोपीय संघ और भारत एफटीए के लागू होने के दो साल बाद समीक्षा खंड के अनुसार इस मुद्दे पर फिर से विचार करेंगे ताकि हम आम सहमति और निवेश उदारीकरण अध्याय के इस पहलू पर ध्यान दे सकें।’
कार्यक्रम में वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन ने नियामक बाधाओं से निपटने के लिए एफटीए में निर्मित ‘त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र’ का जिक्र किया। उन्होंने कहा,‘एफटीए में, कोई देश नए उपाय लाने से पीछे नहीं हटते मगर यह जरूर देखा जाता है कि ये नए उपाय एफटीए के ढांचे के भीतर हैं या नहीं। अगर वे व्यापार को प्रभावित कर रहे हैं तो इसके लिए एक तंत्र है। हम इसे वीआईपी तंत्र कह रहे हैं क्योंकि यह बहुत ही कम समय में उच्चतम स्तर तक पहुंच जाता है।’
इस तंत्र के तहत अगर कोई मुद्दा वार्ताकारों के स्तर पर हल नहीं होता है तो वह बहुत कम समय में सीधे मंत्री स्तर पर पहुंच जाता है। उन्होंने आगे कहा,‘हमारे पास एफटीए में एक बहुत ही नवोन्मेषी गैर-उल्लंघन तंत्र भी है जो यह सुनिश्चित करता है कि एफटीए दायित्व का स्पष्ट या प्रत्यक्ष उल्लंघन बिल्कुल न हो और अप्रत्यक्ष उल्लंघन भी न हो।’