जनवरी 2026 में लगातार पांचवें महीने भारत में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश(एफडीआई) में कमी आई है। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक धन प्रेषण कम रहने और घरेलू फर्मों द्वारा विदेश में निवेश के कारण ऐसा हुआ है।
जनवरी में शुद्ध एफडीआई (-) 1.39 अरब डॉलर रहा, जो दिसंबर में (-) 49.2 करोड़ डॉलर था। जनवरी में सकल एफडीआई की आवक 5.67 अरब डॉलर पर स्थिर रही, जबकि विदेशी निवेशकों द्वारा धन निकासी और विनिवेश बढ़े स्तर पर बना रहा और यह 4.92 अरब डॉलर रहा है। इससे शुद्ध आवक सीमित रही है। इस माह के दौरान भारत में प्रत्यक्ष निवेश 75 करोड़ डॉलर रहा है, जो दिसंबर के 2.54 अरब डॉलर से कम है।
वहीं इस दौरान भारत की कंपनियों द्वारा विदेश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश जनवरी में बढ़कर 2.14 अरब डॉलर रहा, जिससे शुद्ध आवक पर विपरीत असर पड़ा। वित्त वर्ष 2026 में अप्रैल से जनवरी के दौरान शुद्ध एफडीआई 1.65 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 2.16 अरब डॉलर से कम है। इससे कुल मिलाकर शुद्ध आवक में कमी के संकेत मिलते हैं, जबकि सकल निवेश में बेहतर वृद्धि हुई है।
इस अवधि के दौरान विदेश में करीब 75 प्रतिशत निवेश अमेरिका, सिंगापुर, ब्रिटेन और यूएई में हुआ है। बहरहाल पोर्टफोलियो प्रवाह लगातार दबाव में बना हुआ है। जनवरी में शुद्ध पोर्टफोलियो निवेश में 1.92 अरब डॉलर की निकासी हुई है, जबकि दिसंबर में यह 4.22 अरब डॉलर थी।