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पश्चिम एशिया संकट का बड़ा झटका: देश का उर्वरक सब्सिडी बिल 70,000 करोड़ रुपये बढ़ने के आसार

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पश्चिम एशिया संकट के कारण आयात लागत बढ़ने से वित्त वर्ष 2027 में भारत का उर्वरक सब्सिडी बिल 70,000 करोड़ रुपये बढ़कर 2.41 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है

Last Updated- May 18, 2026 | 10:50 PM IST
Fertilizer
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

प​श्चिम ए​शिया संकट के कारण पैदा हुई चुनौतियों के बीच वर्ष 2026-27 के लिए देश के उर्वरक स​ब्सिडी बिल में जबरदस्त इजाफा हो सकता है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने आज कहा कि यूरिया एवं अन्य उर्वरकों की आयात लागत बढ़ने के कारण उर्वरक सब्सिडी बिल में 70,000 करोड़ रुपये से 2.41 लाख करोड़ रुपये तक की वृद्धि हो सकती है। 

अगर सब्सिडी के वास्तविक आंकड़े मौजूदा अनुमानों के करीब हुए तो इसका मतलब साफ है कि वित्त वर्ष 2027 में भारत की उर्वरक सब्सिडी हाल के वर्षों में सर्वा​धिक होगी।

इससे पहले भारत ने वित्त वर्ष 2023 में उर्वरक सब्सिडी मद में वित्त वर्ष 2027 के लिए अनुमानित रकम से अधिक खर्च किया था। उस समय रूस-यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर भारत ने स​ब्सिडी मद में 2,51,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किया था। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उर्वरक सब्सिडी मद में बजट आवंटन 1.71 लाख करोड़ रुपये का है।

उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग के दौरान कहा, ‘सब्सिडी बिल बढ़ेगा लेकिन फिलहाल मैं कह नहीं सकती कि कितने फीसदी की वृद्धि होगी।’

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, जब उनसे पूछा गया  कि क्या यह वृद्धि 70,000 करोड़ रुपये तक हो सकती है तो उन्होंने कहा, ‘हो सकती है।’ शर्मा ने कहा कि लागत संबंधी दबाव के बावजूद 2026 खरीफ सीजन के लिए उर्वरक की उपलब्धता सहज बनी हुई है। उन्होंने कहा कि कुल स्टॉक हमारी 3.9 करोड़ टन  आवश्यकता के 51 फीसदी से अधिक है। बाकी अंतर को विविध आयात स्रोतों के जरिये पूरा किया जा रहा है। आम तौर पर शुरुआती स्टॉक आवश्यक मात्रा का 33 फीसदी होता है। उन्होंने बताया कि मौजूदा उर्वरक स्टॉक करीब 2 करोड़ टन है।

घरेलू उत्पादन लगभग 80,000 टन प्रति दिन हो रहा है। पश्चिम एशिया संकट की शुरुआत के बाद उत्पादन 86.2 लाख टन हुआ है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में दर्ज 93 लाख टन से थोड़ा कम है। 

शर्मा ने कहा, ‘थोड़ी कमी है जिसे हम आगामी महीनों में पूरा करने की उम्मीद करते हैं।’ उन्होंने कहा कि यूरिया कारखानों के लिए पर्याप्त गैस आपूर्ति उपलब्ध है।

भारत होर्मुज स्ट्रेट से इतर आयात मार्गों का सक्रिय तौर पर विविधीकरण कर रहा है और 22 लाख टन से अधिक उर्वरक पहले ही भारतीय तटों पर पहुंच चुके हैं।

भारत ने कंसोर्टियम आधारित खरीद दृष्टिकोण के तहत अमोनियम सल्फेट, फॉस्फेट एवं अन्य कच्चे माल के अलावा करीब 13.5 लाख टन डाई-अमोनियम फॉस्फेट और 7 लाख टन एनपीके कॉम्प्लेक्स उर्वरक की खरीद सुनि​श्चित की है। उर्वरक विभाग यूरिया और जटिल उर्वरक उत्पादन के लिए कच्चे माल की उपलब्धता की भी समीक्षा कर रहा है। एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली के जरिये साप्ताहिक आधार पर सब्सिडी भुगतान क्लियर किए जा रहे हैं। शर्मा ने कहा, ‘अभी   स्थिति मजबूत, स्थिर और सहज बनी हुई है।’

(साथ में एजेंसियां)

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First Published - May 18, 2026 | 10:25 PM IST

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