Budget Target: वित्त वर्ष 2026 में अप्रैल-फरवरी के दौरान केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा कम हुआ है। लेखा महानियंत्रक (सीजीए) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार इस अवधि के दौरान राजकोषीय घाटा कम होकर संशोधित अनुमानों का 80.4 प्रतिशत रहा है। राजस्व घाटे में कमी के कारण ऐसा हुआ है। वहीं इस अवधि के दौरान संशोधित पूंजीगत व्यय का 79.7 प्रतिशत उपयोग किया गया है।
सालाना आधार पर राजकोषीय घाटे में 7 प्रतिशत गिरावट आई है। पिछले वित्त वर्ष में अप्रैल फरवरी के दौरान यह 13.4 लाख करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026 में अप्रैल फरवरी के दौरान 12.5 लाख करोड़ रुपये रह गया है। इस अवधि के दौरान पूंजीगत व्यय सालाना आधार पर 15 प्रतिशत बढ़ गया और फरवरी तक कुल उपयोग 9.3 लाख करोड़ रुपये रहा है।
इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ‘पश्चिम एशिया के संकट की वजह से वित्त वर्ष 2027 के सरकार के बजट का गणित जटिल हो गया है। इससे व्यय और राजस्व दोनों को जोखिम है। खासकर अगर टकराव लंबी अवधि तक बना रहता है तो कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतें हमारे पूर्वानुमानों से अधिक रहेंगी और इसका असर पड़ेगा।’
नॉमिनल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में गिरावट को देखते हुए वित्त वर्ष 2026 में राजकोषीय घाटा 4.5 प्रतिशत के करीब रहने का अनुमान है, जो 4.3 प्रतिशत के संशोधित अनुमान से अधिक है।
बैंक ऑफ बड़ौदा में मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, ‘फरवरी के आंकड़ों से पता चलता है कि राजकोषीय घाटा इस महीने तक नियंत्रण में है। व्यय की पर्याप्त संभावनाएं हैं और पूंजीगत व्यय सही राह पर है। कर राजस्व का 20 प्रतिशत संग्रह अभी होना है। किसी भी तरह के चूक की स्थिति में व्यय से तालमेल करके भरपाई की जा सकती है। युद्ध के असर से व्यय सुस्त हो सकता है, जिससे घाटे का लक्ष्य पूरा करने में मदद मिल सकती है।’
वित्त वर्ष 2026 में अप्रैल-फरवरी के दौरान राजस्व व्यय, संशोधित अनुमानों का 80.5 प्रतिशत रहा। इसमें इस वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में 1 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। इसी अवधि में शुद्ध कर राजस्व में 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई और गैर-कर राजस्व में सालाना आधार पर 18 प्रतिशत वृद्धि हुई। अप्रैल-फरवरी 2026 के लिए शुद्ध कर राजस्व संशोधित अनुमानों का 80.2 प्रतिशत और गैर कर राजस्व 87 प्रतिशत रहा।
सरकार द्वारा शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की घोषणा से लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये राजस्व नुकसान होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी कुछ हद तक भरपाई 1 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक स्थिरीकरण कोष से की जा सकती है, जिसे हाल के संकट जैसी वैश्विक प्रतिकूलताओं से निपटने के लिए बनाया गया है। वित्त मंत्रालय ने चल रहे बजट सत्र के दौरान संसद में पेश किए गए अनुदानों की दूसरी अनुपूरक मांगों के हिस्से के रूप में वित्त वर्ष 2026 के लिए आर्थिक स्थिरीकरण कोष के आवंटन को दोगुना करके 1 लाख करोड़ रुपये कर दिया है।