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घरेलू मांग के दम पर FY27 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.1% रहने का अनुमान: क्रिसिल

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2031 तक निर्यात दोगुना होकर 80 लाख करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान

Last Updated- March 11, 2026 | 6:25 PM IST
GDP
क्रिसिल ने यह अनुमान अपने 10वें वार्षिक India Outlook Conclave में पेश किया।

Crisil annual India Outlook: मजबूत घरेलू मांग और निजी निवेश में धीरे-धीरे बढ़ोतरी के कारण भारत की आर्थिक वृद्धि अगले वित्त वर्ष में भी मजबूत बनी रह सकती है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) के मुताबिक वित्त वर्ष 2027 में भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 7.1% रहने का अनुमान है, जबकि संशोधित आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में यह 7.6% रहने का अनुमान है। क्रिसिल ने यह अनुमान अपने 10वें वार्षिक India Outlook Conclave में पेश किया। एजेंसी का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था घरेलू मांग, सार्वजनिक बुनियादी ढांचा निवेश और निजी क्षेत्र के निवेश चक्र के विस्तार से समर्थित रहेगी। हालांकि भू-राजनीतिक संघर्ष, प्रौद्योगिकी-आधारित व्यवधान, सार्वजनिक ऋण स्तर और जलवायु जोखिमों पर करीबी नजर रखने की जरूरत होगी।

चार प्रमुख मान्यताओं पर आधारित अनुमान

क्रिसिल का यह पूर्वानुमान चार प्रमुख कारकों पर आधारित है। इनमें पहला, इस वर्ष सामान्य मानसून का एक और दौर (हालांकि अगस्त के बाद एल नीनो जैसी परिस्थितियां बनने की संभावना), दूसरा निम्न आधार प्रभाव के कारण कुछ बढ़ोतरी के बावजूद खाद्य मुद्रास्फीति का नियंत्रित रहना, तीसरा ब्रेंट क्रूड की कीमत 75-80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहना और चौथा टैरिफ तथा भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिर वृद्धि शामिल हैं।

क्रिसिल के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमीश मेहता ने कहा कि बाहरी अनिश्चितताओं के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर गति से बढ़ी है। वित्त वर्ष 2027 के लिए अनुमान मजबूत घरेलू कारकों को दर्शाता है, जिनमें खपत, अवसंरचना कैपेक्स, उभरते क्षेत्रों के नेतृत्व में निजी निवेश चक्र में तेजी और व्यापार प्रतिस्पर्धा में सुधार शामिल हैं। हालांकि भू-राजनीतिक संघर्ष, प्रौद्योगिकी-आधारित व्यवधान, सार्वजनिक ऋण स्तर और जलवायु जोखिमों पर करीबी नजर रखने की जरूरत होगी।

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घरेलू खपत अर्थव्यवस्था की धुरी

क्रिसिल के अनुसार वित्त वर्ष 2027 में भी घरेलू मांग ही वृद्धि का प्रमुख इंजन बनी रहेगी। निजी खपत, जो जीडीपी का लगभग 57% है, वृद्धि को सहारा देती रहेगी। हालांकि एकमुश्त कर राहत समाप्त होने से इसकी रफ्तार कुछ कम हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में घरेलू मांग, सार्वजनिक अवसंरचना पर पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) और धीरे-धीरे बढ़ते निजी क्षेत्र के निवेश चक्र के कारण वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद आर्थिक वृद्धि को सहारा मिलता रहेगा। बढ़ते संरक्षणवाद और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था झटकों को झेलने की क्षमता दिखा रही है। घरेलू मांग को आयकर कटौती, वस्तु एवं सेवा कर (GST) दरों के युक्तिकरण, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण में वृद्धि और पर्याप्त तरलता जैसे राजकोषीय उपायों से समर्थन मिल रहा है, जिससे उधारी लागत भी कम हुई है।

महंगाई 4.3% रहने का अनुमान

क्रिसिल के मुताबिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति खाद्य कीमतों के सामान्य होने से बढ़कर 4.3% तक पहुंचने की संभावना है। हालांकि 2024 को आधार वर्ष मानने के कारण खाद्य वस्तुओं का कम भार समग्र मुद्रास्फीति पर दबाव को सीमित रख सकता है, बशर्ते तेल की कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव न हो। ऑटोमोबाइल, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं, विमानन और होटल जैसे विवेकाधीन क्षेत्रों का प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद है।

क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी के अनुसार वित्त वर्ष 2027 में घरेलू मांग सहायक बनी रहेगी क्योंकि राजकोषीय उपायों से लोगों की आय बढ़ेगी और निजी निवेश में हल्की तेजी आएगी। हालांकि भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार संबंधी अनिश्चितताएं जोखिम पैदा कर सकती हैं, जिनका असर कमोडिटी कीमतों, व्यापार और पूंजी प्रवाह के माध्यम से पड़ सकता है।

2031 दोगुना होगा निर्यात

क्रिसिल की इस रिपोर्ट के अनुसार सरकार की अवसंरचना, प्रौद्योगिकी अपनाने, कौशल विकास और बाजार पहुंच को बढ़ाने की रणनीति के कारण भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा भी बेहतर हो रही है। वित्त वर्ष 2031 तक निर्यात के लगभग 80 लाख करोड़ रुपये तक दोगुना होने की संभावना है। निर्यात को वैश्विक मांग, सेवाओं के मजबूत निर्यात और हाल ही में हुए व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसरों से समर्थन मिलेगा। हालांकि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी की कीमतों में उछाल तथा व्यापार और पूंजी प्रवाह में बाधा के रूप में जोखिम पैदा कर सकते हैं।

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कॉरपोरेट राजस्व वृद्धि भी मजबूत रहने का अनुमान

क्रिसिल के मुताबिक कॉरपोरेट राजस्व वृद्धि 8-9% के दायरे में रहने का अनुमान है, जिसे मजबूत खपत और निजी निवेश में धीरे-धीरे बढ़ोतरी से समर्थन मिलेगा। हालांकि कमोडिटी आधारित क्षेत्रों पर कीमतों का दबाव रह सकता है और निर्माण-संबंधित क्षेत्रों में वृद्धि की रफ्तार कुछ धीमी हो सकती है। वास्तविक प्राप्तियों में सीमित वृद्धि के कारण EBITDA मार्जिन 40-60 आधार अंक तक घट सकता है। यदि कच्चे तेल या गैस की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो दबाव और बढ़ सकता है। इसका असर विमानन, सिरेमिक, रसायन, उर्वरक, पेंट, पेट्रोकेमिकल और टायर जैसे क्षेत्रों पर पड़ सकता है।

कम उधारी लागत और लगभग जीडीपी के 3.1% के बराबर सार्वजनिक कैपेक्स मांग को समर्थन देते रहेंगे और निजी निवेश को भी प्रोत्साहित करेंगे। औद्योगिक कैपेक्स उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं और इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), सोलर फोटोवोल्टिक, रक्षा तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े अवसंरचना जैसे उभरते क्षेत्रों से प्रेरित रहेगा।

औद्योगिक पूंजीगत खर्च में तेजी का अनुमान

औद्योगिक पूंजीगत खर्च में तेजी आने का अनुमान लगाया जा रहा है। क्रिसिल इंटेलिजेंस की अध्यक्ष और बिजनेस हेड प्रीति अरोड़ा के अनुसार औद्योगिक कैपेक्स में तेजी आने की संभावना है क्योंकि निवेश चक्र सार्वजनिक अवसंरचना से आगे बढ़कर विनिर्माण और नए क्षेत्रों तक फैल रहा है। वित्त वर्ष 2027 से 2031 के बीच यह निवेश प्रति वर्ष लगभग 9.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जो 1.5 गुना की बढ़ोतरी होगी। इनमें सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स (4.7 गुना), ईवी विनिर्माण व चार्जिंग (3.1 गुना) तथा एसीसी बैटरियां (3.3 गुना) जैसे क्षेत्रों में तेज वृद्धि की उम्मीद है।

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First Published - March 11, 2026 | 6:23 PM IST

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