पश्चिम एशिया में जारी तनाव और घरेलू मांग में संभावित नरमी के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि रफ्तार खो सकती है। चालू वित्त वर्ष में देश की जीडीपी वृद्धि दर 6.6 फीसदी रहने का अनुमान है, जो पिछले वित्त वर्ष में दर्ज 7.7 फीसदी से कम होगी। यह आकलन फिच ग्रुप की कंपनी बीएमआई (BMI) ने किया है।
पिछले सप्ताह जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर बढ़कर 7.7 फीसदी रही, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 7.1 फीसदी थी। इस वृद्धि को मजबूत खपत और निवेश गतिविधियों का समर्थन मिला।
BMI का अनुमान है कि इस कैलेंडर वर्ष के दौरान रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले औसतन 95.1 के स्तर पर कारोबार करेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में औसतन 87 के स्तर से रुपये में आई कमजोरी भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देगी। इससे ईरान संघर्ष के कारण व्यापार शर्तों (टर्म्स ऑफ ट्रेड) पर पड़े नकारात्मक असर से जीडीपी पर पड़ने वाले दबाव की आंशिक भरपाई हो सकेगी।
रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 में लागू किए गए जीएसटी सुधारों के कारण वित्त वर्ष 2025-26 की दिसंबर तिमाही में खपत (कंजम्प्शन) में जोरदार उछाल देखने को मिला था। हालांकि इसके बाद खपत वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ गई और मार्च तिमाही में यह 1.1 फीसदी अंक घटकर सालाना आधार पर 7.1 फीसदी रह गई।
BMI ने कहा, “हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.6 फीसदी रहेगी। यह अनुमान वित्त वर्ष 2025-26 में दर्ज 7.7 फीसदी की वृद्धि दर की तुलना में स्पष्ट रूप से धीमा है, लेकिन पिछले एक दशक में भारत की औसत 6.1 फीसदी सालाना वृद्धि दर से ज्यादा है।”
BMI का यह अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6.6 फीसदी वृद्धि दर के अनुमान के अनुरूप है।
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BMI ने चालू वित्त वर्ष में अपेक्षाकृत धीमी वृद्धि दर के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए हैं। पहला, पिछले वर्ष लागू किए गए जीएसटी सुधारों का घरेलू खपत पर पॉजिटिव प्रभाव धीरे-धीरे कम होने की संभावना है। दूसरा, बढ़ती महंगाई खपत वृद्धि को प्रभावित कर सकती है। BMI का अनुमान है कि होर्मुज स्ट्रेट में संभावित व्यवधान के कारण वित्त वर्ष 2026-27 में महंगाई बढ़कर 5.3 फीसदी तक पहुंच सकती है, जिससे उपभोक्ता मांग पर दबाव पड़ेगा।
BMI ने कहा कि तीसरा कारण निवेश वृद्धि की रफ्तार में संभावित कमी है। रिपोर्ट में कहा गया, “हमें उम्मीद है कि इस वित्त वर्ष के दौरान निवेश वृद्धि धीमी पड़ेगी। हालांकि इसका कारण वित्त वर्ष 2026-27 में आरबीआई द्वारा कुल 50 बेसिस प्वाइंट की संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी का हमारा अनुमान नहीं है, क्योंकि इसका असर मुख्य रूप से वित्त वर्ष 2027-28 की आर्थिक वृद्धि पर दिखाई देगा।”
BMI के अनुसार, 2025 के दौरान आरबीआई द्वारा रीपो रेट में कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती के बाद अल्पकालिक ब्याज दरें अभी भी अपेक्षाकृत निचले स्तर पर हैं। इससे जारी ऊर्जा संकट के बीच अर्थव्यवस्था को सहारा मिलने की संभावना है।
(PTI इनपुट के साथ)