फरवरी 2026 में देश के औद्योगिक उत्पादन ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है, लेकिन इसके साथ ही कुछ ऐसे संकेत भी मिले हैं जो आगे चिंता बढ़ा सकते हैं। एंटीक स्टॉक ब्रोकरेज की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी में औद्योगिक उत्पादन (IIP) सालाना आधार पर 5.2% बढ़ा है। यह बाजार के अनुमान 4.2% से ज्यादा है और पिछले महीने के संशोधित आंकड़े 5.1% से भी बेहतर है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कैपिटल गुड्स में 12.5% और इंफ्रास्ट्रक्चर व कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 11.2% की मजबूत बढ़त देखी गई। हालांकि, उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुओं में 0.6% की गिरावट और प्राथमिक वस्तुओं में सिर्फ 1.8% की धीमी वृद्धि रही।
करीब 78% हिस्सेदारी वाला मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर 6% की दर से बढ़ा, जो पिछले महीने से बेहतर है। खनन में 3.1% और बिजली उत्पादन में 2.3% की बढ़त दर्ज की गई। मोटर वाहन, मशीनरी, बेसिक मेटल और इलेक्ट्रिकल उपकरण जैसे सेक्टर में तेजी रही, जबकि तंबाकू, कपड़ा, दवा और पेय पदार्थ सेक्टर में कमजोरी दिखी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मई 2026 से सरकार औद्योगिक उत्पादन का बेस ईयर 2012 से बदलकर 2023 कर सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, देश की आर्थिक वृद्धि आगे भी मजबूत बनी रह सकती है। इसकी वजह है कि लोगों का खर्च बढ़ रहा है, सर्विस सेक्टर अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, जीएसटी में सुधार हुए हैं, ब्याज दरें कम हैं और रबी फसल भी अच्छी रही है। साथ ही महंगाई भी नियंत्रण में है।
निवेश के मोर्चे पर भी अच्छी स्थिति दिख रही है। कंपनियां अपनी क्षमता का ज्यादा उपयोग कर रही हैं, उनकी बैलेंस शीट मजबूत है और कर्ज (क्रेडिट) भी तेजी से बढ़ रहा है। इसके अलावा सरकार लगातार पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) बढ़ा रही है, जिससे निवेश को और समर्थन मिलेगा।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव एक बड़ा खतरा बन सकता है। इससे बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है और कच्चे माल की कीमतें बढ़ने का जोखिम है, जो आर्थिक वृद्धि को प्रभावित कर सकता है।