भारत के बंदरगाहों पर अप्रैल में अंतरराष्ट्रीय समुद्री कार्गो में दो प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। पश्चिम एशिया संकट के दौरान होर्मूज स्ट्रेट बाधित होने से सरकारी और निजी दोनों बंदरगाहों पर कच्चे तेल, उर्वरक और कोयले की मात्रा में मुख्य तौर पर गिरावट आई।
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार भारत के प्रमुख बंदरगाहों (केंद्र के स्वामित्व वाले) ने अप्रैल में 7.3 करोड़ टन कार्गो संभाला जबकि गैर-प्रमुख बंदरगाहों (निजी और राज्य सरकारों के स्वामित्व वाले) ने 5.95 करोड़ टन कार्गो संभाला।
अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध 28 फरवरी से शुरू होने के बाद बंदरगाहों से निर्यात-आयात (एक्जिम) कार्गो की मात्रा में गिरावट दर्ज होने की प्रवृत्ति जारी है। सरकारी बंदरगाहों से आयात निर्यात की मात्रा में 4.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई जबकि निजी व राज्य समुद्री बोर्ड बंदरगाहों के कार्गो में सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की कमी आई।
प्रमुख बंदरगाहों से कच्चे तेल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की माल ढुलाई में गिरावट जारी रही। भारत अन्य जरूरतों के अलावा तेल व गैस के लिए पश्चिम एशिया के बाजार पर कहीं अधिक निर्भर है। लिहाजा भारत इन उत्पादों के लिए होर्मूज स्ट्रेट की स्थिति पर कहीं अधिक आश्रित है। पश्चिमी तट पर स्थित ज्यादातर प्रमुख बंदरगाहों के आयात-निर्यात की माल ढुलाई में गिरावट दर्ज हुई।
भारत के सबसे बड़े बंदरगाहों में से एक दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (कांडला पोर्ट) ने विदेशी माल ढुलाई में 11 प्रतिशत की कमी दर्ज की जबकि पूर्वी तट पर स्थित कोचीन, न्यू मैंगलोर, पारादीप और कोलकाता बंदरगाहों में भी पिछले महीने माल ढुलाई की मात्रा में गिरावट देखी गई। गुजरात समुद्री बोर्ड में प्रमुख बंदरगाहों मुंद्रा और पिपावाव के साथ-साथ सरकारी व निजी तेल रिफाइनरियों के कैप्टिव पोर्ट शामिल हैं। इसने 3.2 करोड़ टन माल ढुलाई दर्ज की – जो पिछले अप्रैल की तुलना में 2 प्रतिशत कम है।
दूसरी ओर, महाराष्ट्र के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (जेएनपीए) और मुंबई पोर्ट ने माल ढुलाई की मात्रा में भारी वृद्धि दर्ज की है और 1.5 करोड़ टन से अधिक कार्गो संभाला। एनपीए में पहले भीड़भाड़ और माल का जमावड़ा देखा जाता था क्योंकि पश्चिम एशिया जाने वाले निर्यात व आयात का बड़ा हिस्सा इसी बंदरगाह से होता है।
दरअसल, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और जहाजरानी मंत्री सरबानंदा सोनोवाल ने शुक्रवार को कंटेनर फ्रेट स्टेशनों पर ट्रेलर चालकों की कमी के कारण बंदरगाह पर होने वाली भीड़भाड़ पर चर्चा करने के लिए मुलाकात की थी। तटीय माल ढुलाई में वृद्धि और कुछ स्थिरता लौटने से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई के मामले में बंदरगाह लाभ में हैं।