भारत का वस्तु निर्यात चार महीनों में पहली बार फरवरी में 0.8 फीसदी घटकर 36.61 अरब डॉलर रह गया। अधिकारियों ने आगाह किया है कि मार्च का महीना चुनौतीपूर्ण रह सकता है क्योंकि पश्चिम एशिया संकट के कारण होर्मुज स्ट्रेट के जरिये परिवहन बाधित हो रही है।
वाणिज्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि फरवरी में सोना एवं चांदी की कीमतों भारी बढ़त के कारण वस्तुओं का आयात 24.1 फीसदी बढ़कर 63.7 अरब डॉलर पहुंच गया जिससे देश का व्यापार घाटा बढ़कर 27.1 अरब डॉलर हो गया। हालांकि पिछले साल फरवरी में व्यापार घाटा 14.4 अरब डॉलर था। हालांकि जनवरी की तुलना में व्यापार घाटा कम हुआ है। जनवरी में देश का व्यापार घाटा 34.7 अरब डॉलर था।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि चालू वित्त वर्ष चुनौतियों भरा रहा है, इसके बावजूद अप्रैल से फरवरी के दौरान वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात 790.86 अरब रहा जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 5.8 फीसदी अधिक है। सिर्फ वस्तुओं के मामले में निर्यात पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 1.8 फीसदी बढ़कर 402.9 अरब डॉलर रहा।
मार्च का महीना भी व्यापार जगत के लिए चुनौतियों भरा रहेगा क्योंकि उन्हें लॉजिस्टिक्स से जुड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति के चलते निर्यात पर भी असर पड़ेगा। पश्चिम एशिया का संकट, खास तौर पर होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम मार्ग से होने वाली आवाजाही को प्रभावित करने वाला यह संकट व्यापार पर प्रतिकूल असर डाल रहा है और लॉजिस्टिक लागत बढ़ा रहा है।
अग्रवाल ने कहा कि सरकार निर्यात के लिए सहायता और राहत उपायों पर भी विचार कर रही है। उम्मीद है कि इसी हफ्ते उसकी घोषणा की जा सकती है। उन्होंने बताया कि पोत परिवहन मंत्रालय और राजस्व विभागों ने निर्यातकों और आयातकों के लिए पहले ही राहत के उपायों की घोषणा कर दी है।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि व्यापार में निरंतरता बनाए रखने के अलावा सरकार पश्चिम एशिया में संकट के कारण व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के व्यापक प्रभाव का भी बारीकी से विश्लेषण कर रही है, विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण और आवश्यक वस्तुओं के मामले में।
इस महीने की शुरुआत में एक अंतर-मंत्रालय समूह का गठन किया गया था जो निर्यातकों और आयातकों को गोदाम, बंदरगाहों पर भीड़भाड़ और अन्य मुद्दों से जुड़ी रोजमर्रा की चुनौतियों को समझने के लिए प्रतिदिन बैठकें कर रहा है, साथ ही यह समूह इन समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक उपाय भी सुझा रहा है।
अग्रवाल ने कहा, ‘निर्यात पर कुछ असर पड़ेगा लेकिन कुल निर्यात लगभग 860 अरब डॉलर रहने की उम्मीद है। हमें उम्मीद है कि पिछले साल के मुकाबले हम धनात्मक दायरे में बने रहेंगे।’
उन्होंने कहा कि दुनिया के इस हिस्से में हुए नुकसान की भरपाई दूसरे क्षेत्रों में ज्यादा निर्यात करके की जाएगी। फरवरी में सेवाओं का निर्यात एक-चौथाई बढ़कर 39.53 अरब डॉलर हो गया। सेवाओं का आयात 13 फीसदी बढ़कर 16.38 अरब डॉलर रहा जिसके परिणामस्वरूप सेवा व्यापार में 23.2 अरब डॉलर का अधिशेष रहा। हालांकि फरवरी के सेवाओं के व्यापार के आंकड़े अनुमान हैं जिन्हें भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बाद में जारी किए जाने वाले आंकड़ों के आधार पर संशोधित किया जाएगा।