India New Zealand FTA: भारत और न्यूजीलैंड सोमवार को एक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसका मकसद दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को बढ़ावा देना और निवेश को प्रोत्साहित करना है। यह समझौता दोनों पक्षों द्वारा तय की जाने वाली तारीख से लागू होगा। आइए इस समझौते को समझने के लिए कुछ अहम सवालों के जवाब जानते हैं।
FTA एक आर्थिक समझौता होता है, जिसमें दो या अधिक देश आपस में व्यापार होने वाले अधिकतर सामानों पर कस्टम ड्यूटी खत्म या कम करने पर सहमत होते हैं। इसके साथ ही व्यापार और निवेश में बाधा बनने वाले नियमों को भी कम किया जाता है।
इस समझौते में कुल 20 अध्याय शामिल हैं, जिनमें वस्तुओं का व्यापार, नियम (Rules of Origin), सेवाएं, कस्टम और व्यापार सुविधा, SPS, TBT, व्यापार उपाय, विवाद समाधान, और कानूनी प्रावधान शामिल हैं।
टेक्सटाइल, प्लास्टिक, लेदर और इंजीनियरिंग जैसे श्रम-आधारित क्षेत्रों सहित सभी भारतीय सामान न्यूजीलैंड में शून्य शुल्क (Zero Duty) पर जाएंगे। न्यूजीलैंड का औसत आयात शुल्क सिर्फ 2.3% है। न्यूजीलैंड ने 15 साल में 20 अरब डॉलर निवेश (FDI) का वादा किया है। आईटी, शिक्षा, वित्त, पर्यटन, कंस्ट्रक्शन जैसे कई सेवा क्षेत्रों में भारत को मौके मिलेंगे। भारतीय पेशेवरों के लिए 5,000 वीजा कोटा के साथ 3 साल तक काम करने का अवसर मिलेगा। भारत से वाइन और स्पिरिट्स के निर्यात पर ड्यूटी खत्म होगी। न्यूजीलैंड की वाइन पर भारत में धीरे-धीरे 10 साल में ड्यूटी कम होगी।
भारत 70% टैरिफ लाइनों पर बाजार पहुंच देगा। 54.11% न्यूजीलैंड के सामानों को पहले दिन से ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी। इनमें भेड़ का मांस, ऊन, कोयला, और लकड़ी व फॉरेस्ट प्रोडक्ट्स शामिल हैं।
इससे भारतीय ग्राहकों को कुछ चीजें सस्ती मिल सकती हैं। सेब, कीवी, मनुका शहद और डेयरी उत्पादों पर ड्यूटी में छूट, लेकिन कोटा और न्यूनतम कीमत की शर्त के साथ मिलेगी। समुद्री उत्पाद जैसे मसल्स और सैल्मन पर 7 साल में ड्यूटी खत्म होगी। आयरन, स्टील और एल्यूमीनियम स्क्रैप पर 10 साल में ड्यूटी हटेगी। एवोकाडो और पर्सिमन पर भी 10 साल में ड्यूटी खत्म होगी। संवेदनशील कृषि उत्पादों को टैरिफ-रेट कोटा (TRQ), न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) और सुरक्षा उपायों के जरिए नियंत्रित किया जाएगा।
भारत ने किसानों और एमएसएमई सेक्टर के हितों की रक्षा के लिए कई संवेदनशील क्षेत्रों में न्यूजीलैंड को कोई आयात शुल्क छूट नहीं दी है। इन क्षेत्रों में डेयरी उत्पाद, पशु उत्पाद, सब्जियां, चीनी, तांबा और एल्युमीनियम शामिल हैं।
जिन उत्पादों को पूरी तरह छूट सूची में रखा गया है, उनमें डेयरी उत्पाद (दूध, क्रीम, व्हे, दही, चीज आदि), पशु उत्पाद (भेड़ के मांस को छोड़कर), कृषि उत्पाद (प्याज, चना, मटर, मक्का, बादाम आदि), चीनी और कृत्रिम शहद, पशु, वनस्पति या सूक्ष्मजीव वसा और तेल शामिल हैं। इसके अलावा इस सूची में हथियार और गोला-बारूद, रत्न और आभूषण, तांबा और उससे बने उत्पाद, एल्युमीनियम और उससे बने उत्पाद भी हैं।
न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को बढ़ावा देने का वादा किया है। फिलहाल, अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 के बीच भारत को न्यूजीलैंड से केवल 89 मिलियन डॉलर का FDI मिला है।
यह समझौता भारत के लिए एक उच्च आय वाले और नियम-आधारित पैसेफिक मार्केट तक पहुंच को मजबूत करता है। यह भारत की व्यापक इंडो-पैसिफिक आर्थिक रणनीति को भी समर्थन देता है। वहीं, न्यूजीलैंड के लिए यह समझौता दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सुरक्षित पहुंच प्रदान करता है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ रही है।
न्यूजीलैंड में 3 लाख से अधिक भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो वहां की कुल आबादी का लगभग 5% हैं। यह समुदाय व्यापार और निवेश के लिए मजबूत सेतु का काम करता है। आसान वीजा, तेज स्टूडेंट प्रक्रिया और कम शिक्षा लागत से सेवाओं के व्यापार को और बढ़ावा मिल सकता है।
जिन प्रमुख क्षेत्रों में व्यापार है उनमें यात्रा (Travel), आईटी सेवाएं, बिजनेस सेवाएं हैं।
भारत से निर्यात
भारत में आयात
-पीटीआई रिपोर्ट पर आधारित