राष्ट्रीय लेखा के अस्थायी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही। चुनौती भरे समय में यह वृद्धि उम्मीद से बेहतर है और दर्शाता है कि पश्चिम एशिया संकट का आर्थिक गतिविधियों पर सीमित प्रभाव पड़ा है। हालांकि अर्थशास्त्रियों ने आगाह किया है कि संघर्ष के परिणाम और अल नीनो के संभावित प्रभाव से वित्त वर्ष 2027 में वृद्धि पर जोखिम हो सकता है।
जनवरी-मार्च तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की 7.8 फीसदी की वृद्धि दर भारतीय रिजर्व बैंक के 7 फीसदी के अनुमान से अधिक रही। यह रॉयटर्स और ब्लूमबर्ग द्वारा किए गए सर्वेक्षणों में अर्थशास्त्रियों के 7.2 फीसदी के अनुमान से भी अधिक रही।
सांख्यिकी कार्यालय ने पूरे वित्त वर्ष 2026 की वृद्धि को फरवरी के अनुमान की तुलना में 10 आधार अंक बढ़ाकर 7.7 फीसदी कर दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत की मजबूत वृद्धि रफ्तार अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित ताकत, सुधारों की सफलता और 140 करोड़ भारतीयों की कड़ी मेहनत को दर्शाती है। उन्होंने कहा, ‘हम जीवन को सुगम बनाने, व्यापार में सुगमता बढ़ाने और युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।’
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार वैश्विक चुनौतियों के बीच सकारात्मक आर्थिक गति सुनिश्चित करने के लिए निर्णायक नीतिगत उपायों के साथ ‘सुधार एक्सप्रेस’ को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में वृद्धि को व्यापार, होटल और परिवहन क्षेत्र (12.5 फीसदी) में दो अंक की वृद्धि से बल मिला। इस क्षेत्र की वृद्धि दर 12 तिमाही में सबसे अधिक रही। इसी तरह, वित्त, रियल एस्टेट और व्यावसायिक सेवाओं में लगातार तीसरी तिमाही में दो अंक (10.4 फीसदी) की दर से वृद्धि हुई। बेहतर रबी फसल के कारण मार्च तिमाही में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर बढ़कर 3.6 फीसदी हो गई। खनन क्षेत्र में 5.4 फीसदी, बिजली में 4.1 फीसदी और निर्माण क्षेत्र में 8.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि विनिर्माण क्षेत्र, जो लगातार पांच तिमाहियों तक दो अंक की वृद्धि दर्ज कर रहा था, वह एक अंक (7.3 फीसदी) में ही बढ़ा।
12 तिमाहियों में पहली बार सकल स्थिर पूंजी निर्माण में दो अंक की वृद्धि (10.8 फीसदी) देखी गई। निजी अंतिम उपभोग व्यय में वृद्धि भी 7.1 फीसदी पर मजबूत बनी रही। हालांकि इसमें तीसरी तिमाही की तुलना में नरमी आई। सरकारी व्यय की वृद्धि जनवरी-मार्च तिमाही के दौरान 4.9 फीसदी पर धीमी रही क्योंकि केंद्र और राज्य सरकारें राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित कर रही थीं। शुद्ध निर्यात में स्थिर मूल्य आधार पर अधिशेष दर्ज किया गया। इसे कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि और सोने की कीमतों में वृद्धि के कारण आयात में कमी का परिणाम माना जा सकता है।
नॉमिनल जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 8.9 फीसदी कर दिया गया है जिसका पूर्ण मूल्य 346.4 लाख करोड़ रुपये है। इससे सरकार को वित्त वर्ष 2026 में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.4 फीसदी पर बनाए रखने में मदद मिली। हालांकि अर्थशास्त्री भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और संभावित अल नीनो के कारण आपूर्ति झटकों को आर्थिक गतिविधियों के लिए प्रमुख जोखिम बताते हुए वित्त वर्ष 2027 की वृद्धि के दृष्टिकोण पर सतर्क बने हुए हैं।
कोटक महिंद्रा बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री उपासना भारद्वाज ने कहा कि सख्त वित्तीय स्थितियां, उच्च मुद्रास्फीति और कमजोर मॉनसून शहरी और ग्रामीण दोनों मांग पर भारी पड़ सकते हैं।
उन्होंने कहा, ‘हमें इन जोखिमों के सामने आने के तरीके के आधार पर जीडीपी वृद्धि 6 से 6.3 फीसदी के दायरे में रहने की उम्मीद है।’
केयरएज की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा कि चूंकि पश्चिम एशिया संघर्ष का प्रभाव केवल चौथी तिमाही के अंत में देखा गया था, इसलिए भू-राजनीतिक तनाव, ऊंचा कच्चा तेल मूल्य और दूसरे दौर के मूल्य दबावों का पूरा प्रभाव आने वाली तिमाहियों में स्पष्ट होगा। पश्चिम एशिया संघर्ष के समाधान पर अनिश्चितता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख चुनौतियां पेश करती हैं।