भारत और दक्षिण कोरिया ने मौजूदा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) का विस्तार करने के लिए डिजिटल व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और रणनीतिक औद्योगिक सहयोग पर उपसमूह गठित करने का फैसला किया। यह निर्णय बुधवार को संपन्न हुए मुक्त व्यापार समझौते को बेहतर करने के लिए नई दिल्ली में हुई वार्ता के 12वें दौर के दौरान लिया गया।
वाणिज्य विभाग ने गुरुवार को प्रेस विज्ञप्ति में बताया, ‘वर्तमान दौर में वस्तुओं के व्यापार, सेवाओं के व्यापार, उत्पत्ति के नियमों व प्रक्रियाओं, निवेश और स्वच्छता व पादप स्वच्छता मानकों पर बातचीत हुई।’डिजिटल व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला सहयोग और रणनीतिक औद्योगिक सहयोग के क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा करने के लिए उपसमूह गठित करने का भी निर्णय लिया गया।
भारत और दक्षिण कोरिया ने 2009 में एफटीए पर हस्ताक्षर किए थे और इसे 2010 में लागू किया था। हालांकि समझौते के लागू होने के बाद दक्षिण कोरिया के साथ भारत का व्यापार घाटा तेजी से बढ़ा। व्यापार समझौते के महज पांच वर्षों के भीतर ही दक्षिण कोरिया के साथ भारत का व्यापार घाटा लगभग दोगुना हो गया।
इसका कारण यह था कि आयात में 63 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि इस क्षेत्र को निर्यात में केवल 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वाणिज्य विभाग ने विज्ञप्ति में बताया, ‘दोनों पक्षों ने भारत के द्विपक्षीय व्यापार घाटे को स्वीकार किया है जो 2010 में सीईपीए के लागू होने के बाद से काफी बढ़ गया है। सीईपीए के समग्र ढांचे के भीतर इस मुद्दे को हल करने पर सहमति व्यक्त की है।’
दोनों पक्षों ने व्यापार को संतुलित करने के लिए इस वर्ष अप्रैल में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यंग की नई दिल्ली यात्रा के दौरान समझौते की शर्तों की समीक्षा करने पर सहमति जताई। भारत का 2025 में दक्षिण कोरिया के साथ व्यापार घाटा 15.15 अरब डॉलर था। इसमें 21.16 अरब डॉलर का माल आयात शामिल था।
आयात में मुख्य रूप से विद्युत मशीनरी और उपकरण, लोहा व इस्पात, परमाणु रिएक्टर व यांत्रिक उपकरण, खनिज ईंधन और कार्बनिक रसायन शामिल थे। भारत ने पिछले वर्ष दक्षिण कोरिया को 6 अरब डॉलर का सामान निर्यात
किया था।