वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत और दक्षिण कोरिया ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को वर्तमान स्तर से बढ़ाकर 50 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है। दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता भी जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यांग ने कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं और जहाज निर्माण से लेकर कई रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है।
वर्ष 2010 में द्विपक्षीय व्यापार समझौता लागू होने के बाद भारत का दक्षिण कोरिया के साथ व्यापार घाटा बढ़ता गया है। वित्त वर्ष 2022 के बाद कोरिया को भारत के निर्यात में कमी आई। जिन चीजों के निर्यात में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई, उनमें पेट्रोलियम, एल्यूमीनियम तथा लोहा और इस्पात से संबंधित उत्पाद शामिल हैं। यह महत्त्वपूर्ण है कि भारत दोबारा द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत करने पर जोर दे रहा है।
भारत और दक्षिण कोरिया ने जहाज निर्माण में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। वैश्विक स्तर पर जहाज निर्माण में भारत की हिस्सेदारी 2014 में 0.15 प्रतिशत से घटकर 2024 में 0.06 प्रतिशत रह गई, जबकि दक्षिण कोरिया की हिस्सेदारी 2014 में 34.36 प्रतिशत से घटकर 2024 में 28.02 प्रतिशत हो गई। हालांकि वर्ष 2024 में चीन के बाद दक्षिण कोरिया जहाज निर्माण में दूसरे स्थान पर रहा।