facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

FY26 में 7.5–7.8% की रफ्तार से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था: डेलॉयट का अनुमान

Advertisement

डेलॉयट इंडिया के मुताबिक मजबूत घरेलू मांग और सर्विस सेक्टर के दम पर FY26 में तेज ग्रोथ, FY27 में थोड़ी सुस्ती संभव

Last Updated- January 14, 2026 | 4:02 PM IST
India GDP Growth
Representational Image

भारत की अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 7.5 से 7.8 फीसदी की दर से बढ़ सकती है। त्योहारी मांग और सर्विस सेक्टर की मजबूत गतिविधियों से ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा। हालांकि अगले वित्त वर्ष 2026-27 में ग्रोथ की रफ्तार थोड़ी कम होकर 6.6 से 6.9 फीसदी रह सकती है। रिसर्च फर्म डेलॉयट इंडिया ने यह अनुमान जताया है।

डेलॉयट ने कहा कि 2025 को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा माना जाएगा। बीते साल घरेलू मांग मजबूत रही, सरकार ने वित्तीय, मौद्रिक और श्रम नीतियों में अहम सुधार किए और व्यापार नीतियों में भी बदलाव देखने को मिला।

वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूत ग्रोथ

डेलॉयट के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल–सितंबर) में भारत की वास्तविक GDP ग्रोथ 8 फीसदी रही। यह ग्रोथ ऐसे समय में आई है, जब दुनिया भर में व्यापार में रुकावट, विकसित देशों की नीतियों में बदलाव और पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव जैसे जोखिम बने हुए थे।

डेलॉयट इंडिया की अर्थशास्त्री रूमकी मजूमदार ने कहा कि भारत की मजबूत स्थिति कोई संयोग नहीं है, बल्कि यह लगातार ग्रोथ को सपोर्ट देने वाली नीतियों को बढ़ावा देने का नतीजा है। उन्होंने बताया कि 2025 की शुरुआत में ही वैश्विक जोखिमों के संकेत मिलने लगे थे। इसके बाद सरकार ने टैक्स छूट, ब्याज दरों में कटौती और GST में सुधार जैसे कदम उठाए, जिससे मांग को सहारा मिला। कम होती महंगाई ने भी अर्थव्यवस्था को मजबूती दी।

2026 में सप्लाई साइड सुधारों पर फोकस

डेलॉयट के अनुसार, जब मांग से जुड़े बड़े कदम उठाए जा चुके हैं, तो 2026 में सरकार का फोकस सप्लाई साइड सुधारों पर होगा। इसमें MSME सेक्टर को मजबूत करना और टियर-2 व टियर-3 शहरों को नए ग्रोथ सेंटर के तौर पर विकसित करना शामिल है।

व्यापार नीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। भारत ने यूके, न्यूजीलैंड और ओमान के साथ अहम समझौते किए हैं और इजरायल के साथ बातचीत शुरू की है। इसके अलावा EFTA समझौता 2025 में लागू हो गया है। डेलॉयट का कहना है कि इन समझौतों से भारत के निर्यात को नए बाजार मिलेंगे, मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।

वैश्विक जोखिम बने रहेंगे

रूमकी मजूमदार ने कहा कि वैश्विक जोखिम अभी भी बने हुए हैं, हालांकि उनका पूरा असर FY26 में दिखने की संभावना कम है। लेकिन FY27 में ऊंचे बेस और वैश्विक अनिश्चितताओं की वजह से ग्रोथ कुछ धीमी हो सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील इस वित्त वर्ष के अंत तक पूरी हो सकती है, जिससे विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और रुपये को स्थिरता मिल सकती है।

एजेंसी इनपुट के साथ

Advertisement
First Published - January 14, 2026 | 4:02 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement