केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि भारत दक्षिण कोरिया की कंपनियों से अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए प्लग-ऐंड-प्ले बुनियादी ढांचे से लैस एक विशेष ‘कोरिया एन्क्लेव’ या एक बड़ी औद्योगिक टाउनशिप स्थापित करने की योजना बना रहा है।
इंडिया कोरिया बिजनेस फोरम में गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यांग के बीच प्रस्तावित एन्क्लेव पर चर्चा हुई जिसका उद्देश्य कोरियाई कंपनियों के लिए एक तैयार पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है, जिसमें औद्योगिक, वाणिज्यिक और सामाजिक बुनियादी ढांचा शामिल होगा ताकि संचालन आसान हो सके और निवेशकों को अधिक सुविधा मिल सके।
उन्होंने कहा, ‘स्कूल, कॉलेज, होटल, रेस्तरां जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं ताकि कोरिया से आने वाले प्रवासी, जो यहां प्रौद्योगिकी लाते हैं और कोरियाई कंपनियां चलाते हैं, वे भी घर जैसा महसूस कर सकें और हमें विश्वास है कि इससे हमें बड़े पैमाने पर निवेश और पूंजी आकर्षित करने में मदद मिलेगी।’
गोयल ने कहा कि दोनों पक्ष भारत-कोरिया व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को ‘तेजी से, मिशन मोड’ के आधार पर उन्नत करने पर सहमत हुए हैं। समीक्षा में गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने, मूल नियमों को आसान बनाने, बाजार पहुंच का विस्तार करने और द्विपक्षीय व्यापार को अधिक संतुलित बनाने के लिए व्यावसायिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘लक्ष्य एक अधिक न्यायसंगत आर्थिक साझेदारी की ओर बढ़ना है, न कि ऐसी साझेदारी जो बड़े व्यापार घाटे से परिभाषित हो।’ उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा ढांचा भारत के पक्ष में काम नहीं कर पाया है।
गोयल ने कहा कि दोनों पक्ष भारत-कोरिया व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) को उन्नत बनाने के लिए मिशन मोड पर काम करने पर सहमत हुए हैं, जिसमें कई गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करना, दोनों देशों के बीच व्यापार करना आसान बनाना, मूल नियमों को सरल बनाना, बाजार पहुंच का विस्तार करना और दोनों देशों में नए द्वार खोलना शामिल है।