facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

India-US trade agreement: नॉन टैरिफ बैरियर हटाने पर रहेगा जोर

Advertisement

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल इस समय अमेरिका में व्यापार वार्ताकारों की एक टीम का नेतृत्व कर रहे हैं ताकि जल्द से जल्द व्यापार समझौता किया जा सके।

Last Updated- May 19, 2025 | 10:42 PM IST
India US Trade
India US trade agreement

भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए अमेरिका के साथ चल रही बातचीत में भारतीय निर्यातकों की खातिर अमेरिका में गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करने पर जोर देगा। एक वरिष्ठ सरकारी अ​धिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया, ‘अमेरिका के पास गैर-शुल्क बाधाओं की लंबी सूची है जिस पर वह भारत के साथ चर्चा करना चाहता है। हम भी कई गैर-शुल्क बाधाओं का मामला उठाएंगे जिनका सामना हमारी कंपनियों को अमेरिका में करना पड़ता है। हालांकि अमेरिकी पक्ष जीवन एवं स्वास्थ्य (सैनिटरी और फाइटो-सैनिटरी) जैसे गैर-शुल्क उपायों पर चर्चा के लिए उत्सुक नहीं है।’

उक्त अ​धिकारी ने कहा कि उद्योग ने अमेरिका में निर्यात बढ़ाने में प्रमुख बाधाओं के रूप में नियामकीय अड़चन और प्रमाणन की उच्च लागत सहित अन्य मुद्दों को उठाया है। उन्होंने कहा, ‘खाद्य एवं औष​धि प्रशासन (एफडीए) से भारतीय फार्मा निर्यातकों के लिए उत्पाद की मंजूरी की लागत 9,280 से 5,40,00 डॉलर के बीच आती है जबकि अमेरिकी निर्यातकों को अपेक्षाकृत कम लागत में भारतीय बाजार तक पहुंच उपलब्ध है।

ALSO READ: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशकों की बढ़ी टेंशन, निफ्टी रिटर्न पर मंडरा रहा दबाव

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि भारतीय फार्मा निर्यातकों के लिए अमेरिका में प्रमाणपत्र हासिल करने में काफी समय लगता है। उन्होंने कहा, ‘भारतीय कंपनियों को प्रमाणन जारी करने के लिए एफडीए अधिकारियों के फील्ड विजिट का खर्च उठाना पड़ता है जो गैर-शुल्क बाधा है।’

नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर एक पूर्व व्यापार अधिकारी ने कहा कि अक्सर गैर-शुल्क बाधाएं और गैर-शुल्क उपाय के बीच बारीक रेखा होती है। उन्होंने कहा, ‘विनियमन ठीक हैं मगर इसकी व्याख्या के हिसाब से समस्या हो सकती है। हम अमेरिका को बता रहे हैं कि उनके सुरक्षा और डंपिंग विरोधी शुल्क लगातार बढ़ रहे हैं और अस्थायी व्यापार सुरक्षा उपाय एक तरह से स्थायी बन रहे हैं। इस पर हमारे उनके साथ मतभेद हैं।’

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने वर्ष 2022 में ‘भारतीय निर्यातकों के समक्ष अपने शीर्ष साझेदार सदस्यों से आने वाली गैर-टैरिफ बाधाएं’ शीर्षक वाले कार्य पत्र में कहा था कि कृषि उत्पादों के उत्पादन और व्यापार में कीटनाशकों से संबंधित मुद्दे और अनुचित तथा सख्त लेबलिंग एवं पैकेजिंग आवश्यकताओं की वजह से भारत के खाद्य उत्पादों का निर्यात प्रभावित होता है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल इस समय अमेरिका में व्यापार वार्ताकारों की एक टीम का नेतृत्व कर रहे हैं ताकि जल्द से जल्द व्यापार समझौता किया जा सके। गोयल वाशिंगटन में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीर और अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक से मिलने वाले हैं जबकि भारत के मुख्य वार्ताकार और वाणिज्य सचिव पद के लिए मनोनीत राजेश अग्रवाल तकनीकी वार्ता की अगुआई कर रहे हैं।

Advertisement
First Published - May 19, 2025 | 10:28 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement