भारत अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते को तभी लागू करेगा जब उसे यह भरोसा हो जाएगा कि इस समझौते के तहत भारत पर लगने वाला टैरिफ (आयात शुल्क) अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम होगा। यह जानकारी वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को दी।
अधिकारी ने कहा, ‘मैं आज ही समझौता अंतिम रूप दे सकता हूं लेकिन उसे तभी लागू करूंगा जब यह सुनिश्चित हो जाए कि हमारे प्रतिस्पर्धी देशों को हमसे अधिक शुल्क देना पड़ रहा है।’ उन्होंने बताया कि अमेरिका द्वारा लगाया गया 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ 24 जुलाई को समाप्त हो जाएगा। यदि अमेरिका, भारत पर कोई नया अतिरिक्त शुल्क लगाना चाहता है, तो उसे पहले सेक्शन 301 की प्रक्रिया पूरी करनी होगी और भारत को अन्य देशों की तुलना में बेहतर व्यापारिक लाभ देना होगा।
अधिकारी के अनुसार 1974 के अमेरिकी व्यापार अधिनियम की सेक्शन 301 के तहत अमेरिका, भारत पर अपेक्षाकृत कम टैरिफ लगा सकता है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) ने हाल ही में भारतीय वस्तुओं पर 12.5 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, यह शुल्क तुरंत लागू नहीं होगा। अधिकारी ने संकेत दिए कि सेक्शन 301 के तहत अमेरिका भारत सहित उन देशों की व्यापारिक नीतियों की जांच कर सकता है जिन्हें वह अपने व्यापार के लिए नुकसानदायक मानता है।
भारत ने अमेरिका से यह आश्वासन भी मांगा है कि भविष्य में उसके खिलाफ सेक्शन 301 के तहत कोई नई जांच शुरू नहीं की जाएगी। पिछले सप्ताह दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिकी सहायक व्यापार प्रतिनिधि ब्रेंडन लिंच और उनकी टीम चार दिवसीय दौरे पर नई दिल्ली आई थी। इस दौरान भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत हुई।
अधिकारी ने बताया कि भारत और ब्रिटेन के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लागू होने में कुछ और समय लग सकता है।
भारत स्टील से जुड़े 88 टैरिफ उत्पादों पर नुकसान उठाने को तैयार नहीं है। ब्रिटेन ने डंपिंग की आशंका का हवाला देते हुए शुल्क-मुक्त स्टील आयात कोटा में 60 प्रतिशत की कटौती कर दी है। जुलाई से कोटा सीमा से अधिक स्टील आयात पर ब्रिटेन में 50 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा।
पिछले सप्ताह वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में ब्रिटेन के व्यापार एवं उद्योग मंत्री पीटर काइल से मुलाकात की थी। दोनों देशों ने जुलाई 2025 में हस्ताक्षरित एफटीए को लागू करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
निर्यात में मजबूती अधिकारी ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों (अप्रैल-मई) में भारत के व्यापारिक वस्तुओं के निर्यात में सालाना आधार पर 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। अप्रैल-मई 2025 में भारत के व्यापारिक वस्तुओं का निर्यात 76.59 अरब डॉलर था। 15 प्रतिशत वृद्धि के आधार पर अनुमान है कि अप्रैल-मई 2026 में कुल निर्यात लगभग 88.10 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।