भारत और अमेरिका के बीच फरवरी में हुए अंतरिम व्यापार समझौते पर आगे की चर्चा के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल इस महीने के अंत में वाशिंगटन जाएगा। दोनों पक्षों के बीच इस यात्रा की तारीखों पर अभी चर्चा चल रही है। कई महीनों की बातचीत के बाद भारत और अमेरिका ने फरवरी में एक ‘अंतरिम व्यापार समझौते’ के ढांचे की घोषणा की थी। यह समझौता दोनों देशों के बीच पारस्परिक और लाभकारी व्यापार को बढ़ावा देने, बाजार तक पहुंच बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर केंद्रित है।
भारत में अमेरिका के राजदूत और दक्षिण एवं मध्य एशिया के विशेष दूत सर्जियो गोर ने गुरुवार को एक्स पर कहा, ‘दक्षिण और मध्य एशिया में अमेरिका के राष्ट्रपति की व्यापार प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव एम्बेसडर (जेमिसन) ग्रीर के साथ बेहद सार्थक बैठक हुई। अमेरिका और भारत के बीच पहले ही एक व्यापार सौदे पर सहमति हो चुकी है। हम इस महीने के अंत में वाशिंगटन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करने के लिए तैयार हैं।’
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर इस समय अमेरिका की यात्रा पर हैं। उन्होंने गुरुवार को ही अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि वह इस महीने के अंत में वाशिंगटन पहुंचने वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करने और प्रस्तावित व्यापार समझौते पर चर्चा करने के लिए उत्सुक हैं। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब एक दिन पहले ही विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने वाशिंगटन में ‘भारत-अमेरिका व्यापार सुविधा पोर्टल’ की शुरुआत की। दोनों देश आपसी व्यापार को 500 अरब डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
इससे पहले मंगलवार को गोर ने अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा से भी मुलाकात की थी। क्वात्रा ने कहा था कि दोनों पक्ष अपने नेताओं द्वारा तय किए गए रणनीतिक संबंधों के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए ठोस प्रयास कर रहे हैं। व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से चर्चा के लिए दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच आमने-सामने की यह पहली बैठक होगी। यह बैठक पहले ही होनी थी, लेकिन दो महीने पहले अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टैरिफ पर अनिश्चितता की स्थिति बन गई, जिस कारण भारतीय प्रतिनिधिमंडल की वाशिंगटन यात्रा टल गई थी।
मालूम हो कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल 20 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम का उपयोग कर किसी देश पर पारस्परिक टैरिफ लगाने के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के अधिकार को रद्द कर दिया था। इसके बाद ट्रंप द्वारा विभिन्न देशों पर लगाए गए भारी शुल्क को समाप्त कर दिया गया और 24 फरवरी से अमेरिकी प्रशासन ने 150 दिनों के लिए सभी देशों पर 10 प्रतिशत का समान शुल्क लगाया था। भारत और अमेरिका ने 2 फरवरी को व्यापार सौदे की घोषणा की थी और मार्च तक इस समझौते पर हस्ताक्षर करने की योजना बनाई थी। इसी संबंध में 7 फरवरी को एक संयुक्त बयान जारी किया गया था।
इसी के साथ रूस से भारतीय तेल आयात का हवाला देते हुए अमेरिका द्वारा भारत के कुछ निर्यात पर लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ को हटा दिया गया था। अंतरिम समझौते के अनुसार अमेरिका ने भारत के लिए टैरिफ को 18 प्रतिशत तक कम करने पर सहमति व्यक्त की थी। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से भारतीय पक्ष ने बार-बार यह बात दोहराई कि अमेरिकी प्रशासन द्वारा नई वैश्विक टैरिफ संरचना तैयार करने तक वह अंतरिम व्यापार सौदे पर हस्ताक्षर करने के लिए इंतजार करेगा। इस महीने के अंत में होने वाली बैठक से टैरिफ पर आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है। (साथ में एजेंसियां)