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युद्ध की ‘तपिश’ से चौतरफा संकट: आसमान में महंगा हुआ सफर, जमीन पर सर्विस सेक्टर का हाल-बेहाल

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पश्चिम एशिया युद्ध से विमान ईंधन और एलपीजी की भारी किल्लत हो गई है। विमानन, पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्रों में लागत बढ़ने से आम जनता की जेब पर बोझ बढ़ा है

Last Updated- March 15, 2026 | 10:52 PM IST
Service Sector
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

पश्चिम एशिया में युद्ध को दो हफ्ते हो चुके हैं और इस बढ़ते संघर्ष का असर भारत के सभी सेवा क्षेत्रों में महसूस किया जा रहा है। विमानन क्षेत्र को जबरदस्त झटका लगा है और आतिथ्य-सत्कार, ट्रैवल तथा ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्र एलपीजी की कमी और खाने-पीने की चीजों की बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं। इसका असर उनके कामकाज पर पड़ रहा है। महंगे विमान ईंधन (एटीएफ) की वजह से विमानन कंपनियों की लंबी उड़ानों की लागत बढ़ रही है। इससे यात्रियों को भी अ​धिक लागत झेलनी पड़ रही है।

जमीन की बात करें, तो एलपीजी की कमी के कारण क्लाउड-किचन, रेस्तरां और होटलों में आतिथ्य-सत्कार सेवाओं में कमी आई है। लॉजिस्टिक क्षेत्र को कर्मचारियों की कमी का सामना करना पड़ा है, क्योंकि रोजाना का खाना पकाने में इस्तेमाल एलपीजी की आपूर्ति में रुकावट से उन प्रवासी मजदूरों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया, जो फुलफिलमेंट केंद्रों (सामान पहुंचाने वाले केंद्रों) में काम करते हैं। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो क्विक-कॉमर्स चैनलों की आपूर्ति करते हैं।

विमानन

28 फरवरी को जब से यह संघर्ष शुरू हुआ है, तब से सभी भारतीय विमानन कंपनियों को अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का बड़ा हिस्सा रद्द करना पड़ा है। इससे उनके मुनाफे में भारी कमी आने वाली है। इसकी वजह यह है कि आम तौर पर घरेलू उड़ानों के मुकाबले अंतरराष्ट्रीय उड़ानें विमानन कंपनियों के लिए ज्यादा फायदेमंद होती हैं और राजस्व तथा मुनाफे में ज्यादा हिस्सेदारी करती हैं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र बंद हो जाने के कारण न केवल प​श्चिम ए​शिया, बल्कि यूरोप जाने वाली उड़ानें भी पहले से ही प​श्चिम ए​शिया के रास्ते से होकर गुजर रही थीं।

उड़ानों के रद्द होने और उनकी समयसारणी में बदलाव की इस लहर के साथ-साथ एटीएफ की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी ने देश की प्रमुख विमानन कंपनियों के परिचालन खर्चों में खासा इजाफा कर दिया है। 4 मार्च को एटीएफ की कीमतें बढ़कर प्रति बैरल 225.5 डॉलर तक पहुंच गईं, जो कि इसकी औसत कीमत से लगभग 167 प्रतिशत ज्यादा हैं।

ट्रैवल

ट्रैवल कंपनियों और टूर सेवा उपलब्ध कराने वालों का कहना है कि ट्रैवल की कुल लागत बढ़ने वाली है। कुछ का अनुमान है कि आने वाले समय में लागत 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। एक ट्रैवल एग्रीगेटर के वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की लागत बढ़ जाएगी, जो आम तौर पर यात्रा की कुल लागत का बड़ा हिस्सा होती है। इसके परिणामस्वरूप आने वाले हफ्तों और महीनों में ग्राहकों का खर्च भी बढ़ जाएगा।’

प्राइड होटल्स ग्रुप के मुख्य कार्य अधिकारी सत्येन जैन ने कहा, ‘अगर युद्ध जारी रहता है, तो भारत में होने वाले कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए आने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की यात्रा आगे ​खिसकाई की जा सकती है। आगामी गर्मियों की छुट्टियों में अंतरराष्ट्रीय यात्रा करना, खास तौर पर दुनिया के पश्चिमी हिस्सों में, अधिक महंगा हो सकता है। ऐसे में घरेलू पर्यटन स्थलों की मांग बढ़ने का अवसर मिल सकता है।’

होटल और रेस्तरां

आतिथ्य-सत्कार क्षेत्र की बात करें, तो पिछले दो हफ्ते होटलों और रेस्तरों की रसोई में एलपीजी की आपूर्ति सुनि​श्चित करने पर केंद्रित रहे हैं। इसके लिए इंडक्शन कुकटॉप जैसे दूसरे विकल्पों को अपनाने तथा तंदूर जैसे पुराने तरीकों पर लौटने के कदम उठाए गए हैं।

यहां तक कि बैंक्वेट और शादियों जैसे बड़े स्तर पर खाना बनाने के लिए बाहर खुली रसोई में लकड़ी का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। बेंगलूरु, मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों में कई रेस्तरां और भोजनालयों ने गैर-व्यस्तता वाले  समय में अपनी दुकानें बंद कर दीं, जबकि दूसरों ने एलपीजी की कमी, घबराहट में की जाने वाली खरीदारी और कीमतों में तेजी की शिकायत की।

​क्विक-कॉमर्स

​स्विगी इंस्टामार्ट, ​ब्लिंकइट और जेप्टो जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की श्रेणी में इंडक्शन कुकटॉप, इलेक्ट्रिक केतली और एयर फ्रायर जैसे कई सामान फिलहाल या तो स्टॉक में नहीं हैं या बहुत कम मात्रा में उपलब्ध हैं, क्योंकि एलपीजी की आपूर्ति में कटौती के बीच इनकी मांग अचानक बढ़ गई है।

लॉजिस्टिक

कंपनियों में लॉजिस्टिक पर कर्मचारियों की कमी का असर पड़ रहा है, क्योंकि वेयरहाउस के कामकाज में मदद करने वाले कई मजदूरों की रोजमर्रा की जिंदगी एलपीजी की कमी के कारण अस्त-व्यस्त हो गई है क्योंकि रोजाना का खाना पकाने के लिए एलपीजी का इस्तेमाल किया जाता है।

आईटी सेवाएं

देश के 300 अरब डॉलर के आईटी सेवा उद्योग के मामले में पश्चिम एशिया का संकट भले ही सीधे तौर पर कोई बड़ा झटका न दे, लेकिन इसके दूसरे असर पहले से महसूस किए जाने लगे हैं। इस इलाके में लगी पाबंदियों के मद्देनजर कई कंपनियों ने अपने अ​धिकारियों से कहा है कि वे अपनी यात्राएं सीमित रखें।

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First Published - March 15, 2026 | 10:52 PM IST

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