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कचरे से कमाई का बड़ा मौका! 2047 तक 51 अरब डॉलर का बाजार और 26 लाख नौकरियों की संभावना

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भारत में जैविक कचरे के सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल से 2047 तक 26 लाख नौकरियां और 51 अरब डॉलर तक का बाजार अवसर बन सकता है।

Last Updated- May 29, 2026 | 4:21 PM IST
Waste managment
Representative image

भारत के शहरों में तेजी से बढ़ रहा जैविक कचरा (ऑर्गेनिक वेस्ट) अब सिर्फ एक चुनौती नहीं, बल्कि रोजगार, स्वच्छ ऊर्जा और आर्थिक विकास का बड़ा अवसर बन सकता है। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, अगर भारत जैविक कचरे के प्रबंधन के लिए सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल अपनाता है, तो 2047 तक 51 अरब डॉलर का बाजार तैयार हो सकता है और करीब 26 लाख प्रत्यक्ष रोजगार पैदा किए जा सकते हैं। रिपोर्ट का अनुमान है कि अगर कचरा प्रबंधन की रफ्तार और तेज हुई तो यह बाजार 61 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

क्या होता है जैविक कचरा?

जैविक कचरे में घरों की रसोई, सब्जी और फल मंडियों, बागवानी, फूलों, मांस और अन्य सड़ने-गलने वाले कचरे शामिल होते हैं। आमतौर पर इसे गीला कचरा भी कहा जाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, अगर जैविक कचरे की सही तरीके से प्रोसेसिंग की जाए तो 2047 तक लगभग 6.8 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर उत्सर्जन को कम किया जा सकता है। दूसरी ओर, अगर कचरे का सही प्रबंधन नहीं हुआ तो उत्सर्जन बढ़कर 12 करोड़ टन तक पहुंच सकता है।

CEEW की फेलो प्रार्थना बोराह के मुताबिक, कचरा प्रबंधन केवल सफाई का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह स्वच्छ हवा और बेहतर शहरी जीवन से भी जुड़ा हुआ है। खुले में कचरा जलाने से पीएम 2.5 प्रदूषण का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा पैदा होता है। वहीं बिना प्रबंधन वाला जैविक कचरा मीथेन गैस, दुर्गंध, आग और अन्य पर्यावरणीय समस्याओं को बढ़ाता है।

24 अरब डॉलर निवेश की जरूरत

फिलहाल भारत के शहरों में हर दिन करीब 1.71 लाख टन ठोस कचरा निकलता है, जिसमें लगभग आधा हिस्सा जैविक कचरे का होता है। लेकिन कुल शहरी कचरे का केवल 61 प्रतिशत ही प्रोसेस किया जाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2047 तक शहरी जैविक कचरा बढ़कर सालाना करीब 20.8 करोड़ टन तक पहुंच सकता है। अगर इस कचरे को सही तरीके से प्रोसेस किया जाए तो इससे खाद, बायोगैस और बायो-मीथेन तैयार की जा सकती है। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा।

CEEW का अनुमान है कि शहरी जैविक कचरा प्रबंधन का बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए 2047 तक करीब 24 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत होगी।

लाखों नौकरियां पैदा हो सकती हैं

रिपोर्ट में कहा गया है कि कचरे के संग्रह, छंटाई, प्रोसेसिंग, प्लांट संचालन, तकनीकी रखरखाव और अन्य सेवाओं में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा हो सकते हैं। बेहतर कचरा प्रबंधन से करीब 26 लाख प्रत्यक्ष नौकरियां बनने की संभावना है।

रिपोर्ट का मानना है कि अगर भारत जैविक कचरे को समस्या की बजाय संसाधन के रूप में देखे और उसके प्रबंधन पर तेजी से काम करे, तो यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में रोजगार, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

CEEW ने दिए 5 सुझाव

सीईईडब्ल्यू ने जैविक कचरे की पूरी क्षमता का लाभ उठाने के लिए पांच प्रमुख सुझाव दिए हैं। सबसे पहले, कचरे की सही छंटाई और बेहतर गुणवत्ता वाला फीडस्टॉक सुनिश्चित करना होगा। दूसरा, कचरे की मात्रा और उसके प्रकार से जुड़े आंकड़ों को नियमित रूप से अपडेट करना होगा। तीसरा, सरकारी अनुबंधों में गुणवत्ता आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देना होगा। चौथा, इस क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों के प्रशिक्षण और कौशल विकास पर ध्यान देना होगा। पांचवां, खाद, फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर और बायो-सीएनजी जैसे उत्पादों के लिए मजबूत बाजार तैयार करना होगा।

इसके अलावा ग्रीन बॉन्ड, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP), हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल और यूजर चार्ज जैसे वित्तीय उपायों को भी बढ़ावा देने की जरूरत बताई गई है।

मार्केट में कितनी क्षमता?

आउटलुक निवेश क्षमता (अरब US डॉलर) संभावित मार्केट साइज (अरब US डॉलर) रोजगार सृजन क्षमता (लाख में)
सामान्य स्थिति 4.5 10.0 21
तेज नीतिगत सुधार 24.3 50.6 26
महत्वाकांक्षी हरित परिवर्तन 30.2 61.5 19

Source: Organic Waste Circular Economy for Viksit Bharat (2026)

नोट: Ambitious Green Transition scenario में रोजगार की संख्या अपेक्षाकृत कम है क्योंकि इसमें बायोमीथेनेशन पर ज्यादा जोर है, जो कम्पोस्टिंग की तुलना में अधिक ऑटोमेटेड और पूंजी-प्रधान (Capital Intensive) तकनीक है।

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First Published - May 29, 2026 | 3:46 PM IST

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