India Composite PMI: भारत के निजी क्षेत्र की कारोारी गतिविधियों में मई में भी विस्तार जारी रहा। एचएसबीसी फ्लैश इंडिया कंपोजिट पीएमआई अप्रैल के 58.2 से मामूली घटकर मई में 58.1 पर आ गया। एसएंडपी ग्लोबल के आंकड़ों के अनुसार यह लगातार मजबूत आर्थिक गतिविधियों का संकेत देता है। आंकड़ों से पता चला कि सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में तेजी आई, लेकिन फैक्टरी उत्पादन की वृद्धि कमजोर रही। मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन में वृद्धि की रफ्तार मध्य 2022 के बाद दूसरी सबसे धीमी रही।
एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा, “मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में मामूली नरमी देखी गई क्योंकि उत्पादन और नए ऑर्डर की वृद्धि दर धीमी हुई। नए निर्यात ऑर्डर की वृद्धि में भी उल्लेखनीय कमी आई। इसके बावजूद मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई अपने दीर्घकालिक औसत के करीब बना रहा, जिसे लगातार बढ़ते इन्वेंट्री स्तर का समर्थन मिला।”
उन्होंने कहा कि तैयार माल का भंडार लगातार दूसरे महीने बढ़ा, जबकि कच्चे माल की खरीद का स्टॉक पिछले तीन महीनों में सबसे तेज गति से बढ़ा। लागत का दबाव भी बढ़ा है और इनपुट कीमतों में जुलाई 2022 के बाद सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई।
मई में भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ थोड़ी धीमी हो गई। एचएसबीसी फ्लैश इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई अप्रैल के 54.7 से घटकर मई में 54.3 पर आ गया। इसका मतलब है कि फैक्टरी गतिविधियां बढ़ तो रही हैं, लेकिन पहले जितनी तेजी से नहीं।
एसएंडपी ग्लोबल के सर्वे के मुताबिक खासतौर पर निर्यात बाजार में मांग कमजोर रही। नए निर्यात ऑर्डर की वृद्धि पिछले 19 महीनों में सबसे कम रही। अंतरराष्ट्रीय बिक्री की रफ्तार भी सितंबर 2024 के बाद सबसे कमजोर स्तरों में शामिल रही। इसके बावजूद कंपनियों ने स्टॉक बढ़ाना जारी रखा। कच्चे माल की खरीद पिछले तीन महीनों की सबसे तेज रफ्तार से बढ़ी और सप्लायर्स ने समय पर डिलीवरी भी दी।
मैन्युफैक्चरिंग में सुस्ती के बीच सेवा क्षेत्र की अच्छी ग्रोथ ने अर्थव्यवस्था को सहारा दिया। हालांकि मई में मैन्युफैक्चरिंग और सेवा दोनों क्षेत्रों में नए कारोबार की रफ्तार कुछ धीमी रही। कमजोर मांग, बढ़ती प्रतिस्पर्धा, यात्रा में रुकावटें और पश्चिम एशिया में तनाव ने भी बिक्री पर असर डाला।
मई में कंपनियों की लागत तेजी से बढ़ी। ऊर्जा, ईंधन, गैस, धातु, प्लास्टिक, रबर और ट्रांसपोर्ट जैसी चीजें महंगी होने से मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों पर दबाव बढ़ा। हालांकि कंपनियों ने ग्राहकों पर ज्यादा बोझ नहीं डाला। बिक्री कीमतों में जनवरी के बाद सबसे धीमी बढ़ोतरी हुई। इससे साफ है कि कंपनियां कीमतें बढ़ाने में सावधानी बरत रही हैं।
निजी क्षेत्र में नौकरी की स्थिति सकारात्मक बनी रही। सेवा क्षेत्र में भर्ती लगभग एक साल की सबसे तेज गति से बढ़ी, जबकि मैन्युफैक्चरिंग में भी रोजगार बढ़ा, हालांकि रफ्तार थोड़ी धीमी रही। मई में कारोबारी भरोसा थोड़ा कमजोर जरूर हुआ, लेकिन कंपनियां अब भी भविष्य को लेकर सकारात्मक हैं। कंपनियों को उम्मीद है कि बाजार की स्थिति आगे बेहतर होगी।