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भारत का ऋण-जीडीपी अनुपात स्थिर रहने की उम्मीद: IMF अधिकारी 

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Last Updated- April 12, 2023 | 7:27 PM IST
GDP base year revision: Government considering changing the base year for GDP calculation to 2022-23 जीडीपी गणना के लिए आधार वर्ष को बदलकर 2022-23 करने पर विचार कर रही सरकार

भारत का ऋण-जीडीपी अनुपात भविष्य में स्थिर रहने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह अनुमान जताते हुए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को तार्किक और सरल बनाने की सिफारिश की।

आईएमएफ के राजकोषीय मामलों के विभाग में उप निदेशक पाओलो मौरो ने कहा कि मध्यावधि में वैश्विक सार्वजनिक ऋण-जीडीपी अनुपात में क्रमिक रूप से बढ़ोतरी होगी।

मौरो ने पीटीआई-भाषा से बातचीत में कहा, ”हमारा अनुमान है कि वैश्विक सार्वजनिक ऋण-जीडीपी अनुपात 2028 तक फिर से 100 प्रतिशत पर पहुंच जाएगा। इसमें कुछ साल लगेंगे, लेकिन बदलाव की दिशा यही रहेगी।”

दुनिया भर की सरकारों ने 2020 में आम लोगों और कंपनियों का समर्थन करने के लिए बड़े पैमाने पर हस्तक्षेप किया। इस वजह से सरकारी खर्च और सरकारी ऋण में बड़ी वृद्धि हुई।

उन्होंने कहा, ”सार्वजनिक ऋण-जीडीपी अनुपात 2020 के अंत में 100 प्रतिशत उच्च स्तर पर पहुंच गया था। बाद के वर्षों में इसमें सुधार हुआ और वैश्विक स्तर पर 2022 के अंत में ऋण-जीडीपी अनुपात 92 प्रतिशत था।”

आईएमएफ के मुताबिक चीन, अमेरिका और कुछ हद तक ब्रिटेन, जापान और फ्रांस में भी ऋण-जीडीपी अनुपात बढ़ सकता है।

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First Published - April 12, 2023 | 7:27 PM IST

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