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7.7% से 6% तक आ सकती है भारत की ग्रोथ रेट! क्या मुश्किल दौर आने वाला है?

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रिपोर्ट के अनुसार जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही में अर्थव्यवस्था की रफ्तार बनी रही। इस दौरान जीडीपी 7.8 फीसदी की दर से बढ़ी

Last Updated- June 08, 2026 | 9:14 AM IST
India Economic Growth Outlook

India Economic Growth Outlook: भारत की अर्थव्यवस्था ने पिछले वित्त वर्ष में मजबूत प्रदर्शन किया, लेकिन आने वाला साल उतना आसान नहीं दिख रहा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारत पर भी पड़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ने, कंपनियों की लागत बढ़ने और लोगों की जेब पर दबाव पड़ने की आशंका है। हालांकि निवेश और खपत के दम पर अर्थव्यवस्था अब भी मजबूत स्थिति में नजर आ रही है।

ब्रोकरेज फर्म नुवामा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन चुनौतियों को देखते हुए वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान घटाया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही में अर्थव्यवस्था की रफ्तार बनी रही। इस दौरान जीडीपी 7.8 फीसदी की दर से बढ़ी। हालांकि लोगों के खर्च की रफ्तार कुछ धीमी हुई, लेकिन निवेश में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली।

निवेश से जुड़ी गतिविधियां बढ़ने की वजह से अर्थव्यवस्था को सहारा मिला। दूसरी तरफ विदेश व्यापार का योगदान कमजोर रहा, जिसका असर वृद्धि पर पड़ा।

पूरे साल कैसा रहा प्रदर्शन?

पूरे वित्त वर्ष 2026 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.7 फीसदी रही, जो पिछले साल 7.1 फीसदी थी। यानी आर्थिक गतिविधियों में तेजी देखने को मिली। उद्योग और सेवा क्षेत्र ने इसमें सबसे ज्यादा योगदान दिया। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि बढ़ी, जबकि होटल, व्यापार और दूसरी सेवाओं से जुड़ी गतिविधियों में भी अच्छा उछाल देखने को मिला। हालांकि खेती का प्रदर्शन पिछले साल के मुकाबले थोड़ा कमजोर रहा। कृषि क्षेत्र की वृद्धि घटकर 3 फीसदी रह गई। लोगों का खर्च और निवेश दोनों बढ़े, जिससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली। इसी वजह से पूरे साल वृद्धि दर मजबूत बनी रही।

यह पढ़ें: FY26 में 7.7% की रफ्तार से बढ़ी देश की अर्थव्यवस्था, पिछली तिमाही में 7.8% रही GDP ग्रोथ रेट

India Economic Growth Outlook: FY27 में क्यों बढ़ सकती हैं चुनौतियां?

नुवामा का कहना है कि नया वित्त वर्ष कई चुनौतियां लेकर आ सकता है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से तेल और दूसरे कच्चे माल की कीमतें ऊंची रह सकती हैं। इससे कंपनियों का खर्च बढ़ेगा और आम लोगों पर भी असर पड़ेगा। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है और मानसून भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहता तो महंगाई और आर्थिक वृद्धि दोनों पर दबाव आ सकता है। इसी वजह से ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि का अनुमान घटाकर 6 से 6.5 फीसदी कर दिया है।

फिर भी राहत की कुछ वजहें

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक की नीतियां अर्थव्यवस्था को सहारा दे सकती हैं। बाजार में पर्याप्त नकदी, कर्ज में बढ़ोतरी और रुपये की स्थिति भी मददगार साबित हो सकती है। हालांकि चुनौतियां बढ़ी हैं, लेकिन नुवामा का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियाद अब भी मजबूत है। इसी वजह से उसे उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 में नाममात्र जीडीपी वृद्धि 11 से 12 फीसदी के बीच रह सकती है।

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First Published - June 8, 2026 | 9:14 AM IST

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