RBI MPC 2026:भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को (8 अप्रैल) को मौद्रिक नीति का ऐलान कर दिया। आरबीआई ने रीपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा है। पॉलिसी का ऐलान करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra) ने वित्त वर्ष 2027 में जीडीपी ग्रोथ 6.9 फीसदी और महंगाई दर 4.6 फीसदी रहने का अनुमान जताया। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि वेस्ट ए शिया में तनाव का असर जीडीपी ग्रोथ पर पड़ा है और कच्चे तेल में तेजी से महंगाई बढ़ सकती है।
आरबीआई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की यह बैठक 6 से 8 अप्रैल तक चली। नए वित्त वर्ष की यह पहली पॉलिसी है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है। इस संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया, जिससे रुपये पर दबाव देखने को मिला। हालांकि, दोनों देशों के बीच दो हफ्ते के संघर्ष विराम की खबर से कुछ राहत की उम्मीद जगी है।
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। गवर्नर के मुताबिक, 2025-26 में यह दर 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, यानी नए वित्त वर्ष में ग्रोथ थोड़ी नरम रह सकती है।
केंद्रीय बैंक के अनुसार FY27 में ग्रोथ का ट्रेंड धीरे-धीरे मजबूत होगा
RBI ने पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई दर 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। गवर्नर ने कहा कि फिलहाल महंगाई नियंत्रण में है और लक्ष्य के आसपास बनी हुई है, लेकिन आगे जोखिम बढ़े हैं।
RBI गवर्नर ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, ऊर्जा लागत का दबाव और मौसम से जुड़े जोखिम खाद्य कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। इससे महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
मौद्रिक नीति के तहत RBI ने अपना रुख ‘न्यूट्रल’ रखा है। यानी आगे जरूरत के हिसाब से ब्याज दरों में बदलाव की गुंजाइश बनी रहेगी।
गौरतलब है कि फरवरी 2025 से अब तक RBI कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर चुका है। इस बार भी बाजार की उम्मीदों के अनुरूप दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया।
RBI का कहना है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है और आगे भी आर्थिक गतिविधियों में स्थिरता बनी रहने की उम्मीद है।
इससे पहले 6 फरवरी 2026 को हुई MPC बैठक में भी रपो रेट को बिना बदलाव के रखा गया था और रुख ‘न्यूट्रल’ ही रखा गया था। उस समय RBI ने महंगाई के अनुमान में हल्का संशोधन करते हुए इसे 2.1 प्रतिशत किया था, जो पहले 2 प्रतिशत था।
तिमाही अनुमान इस तरह थे-
तब गवर्नर ने कहा था कि आगे की नीति महंगाई के ताजा आंकड़ों पर निर्भर करेगी। साथ ही Q3, Q4 और पूरे साल के अनुमान अप्रैल बैठक तक टाल दिए गए थे।
फरवरी की बैठक के बाद पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू हो गया, जिससे वैश्विक हालात तेजी से बदले। तेल की कीमतों में उछाल और बाजार में अस्थिरता के कारण अब RBI को महंगाई के जोखिम ज्यादा नजर आ रहे हैं।
इसी बीच महंगाई मापने के तरीके में भी बड़ा बदलाव हुआ है। सरकार ने कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI का बेस ईयर 2012 से बदलकर 2024 कर दिया है।
इस बदलाव में अब लोगों के खर्च के नए पैटर्न को शामिल किया गया है, जैसे डिजिटल सेवाओं पर बढ़ता खर्च और खानपान की आदतों में बदलाव। इससे महंगाई के आंकड़े अब मौजूदा दौर के हिसाब से ज्यादा सटीक माने जा रहे हैं।