facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

अप्रैल में दौड़ी फैक्ट्रियां! IIP ग्रोथ में जोरदार उछाल, लेकिन आगे बड़ा खतरा बरकरार

Advertisement

महंगाई, सप्लाई चेन की दिक्कतें, अल नीनो और कमजोर मानसून की आशंका आने वाले महीनों में उद्योगों की रफ्तार पर असर डाल सकती हैं

Last Updated- June 02, 2026 | 10:57 AM IST
IIP Data April 2026

IIP April 2026: देश की औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ी अच्छी खबर आई है। अप्रैल महीने में फैक्ट्रियों और उद्योगों की रफ्तार पहले के मुकाबले तेज हुई है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सुधार की वजह से औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) की ग्रोथ बढ़कर 4.9 फीसदी पहुंच गई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि आगे का रास्ता अभी पूरी तरह आसान नहीं है।

ब्रोकरेज हाउस नुवामा की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में IIP ग्रोथ 3.2 फीसदी थी, जो अप्रैल में बढ़कर 4.9 फीसदी हो गई। इस सुधार में सबसे बड़ा योगदान मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का रहा।

सरकार ने IIP के आंकड़ों में किया बड़ा बदलाव

सरकार ने IIP का बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है। आसान भाषा में कहें तो अब औद्योगिक उत्पादन को मापने का तरीका पहले से ज्यादा अपडेट किया गया है। पहले IIP में मुख्य तौर पर खनन, मैन्युफैक्चरिंग और बिजली क्षेत्र शामिल थे। अब इसके दायरे को बढ़ाकर गैस, पानी की सप्लाई, सीवरेज और वेस्ट मैनेजमेंट जैसी गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। खनन क्षेत्र में भी अब रेयर अर्थ मिनरल्स जैसे खनिजों को जगह दी गई है। नुवामा का कहना है कि नए बदलावों की वजह से पुराने और नए IIP आंकड़ों की सीधी तुलना करना सही नहीं होगा।

यह पढ़ें: मई में GST संग्रह ने पकड़ी रफ्तार, 3.3% की बढ़त के साथ 1.67 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचा राजस्व संग्रह

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने दिखाई ताकत

अप्रैल में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ बढ़कर 6.2 फीसदी रही, जबकि मार्च में यह 3.9 फीसदी थी। यही वजह रही कि कुल औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े भी बेहतर नजर आए। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बड़ी तस्वीर देखें तो मैन्युफैक्चरिंग की रफ्तार कुछ धीमी हुई है। FY25 में इस सेक्टर की ग्रोथ 6.2 फीसदी थी, जो FY26 में घटकर 4.9 फीसदी रह गई।

बिजली की मांग बढ़ी, खनन ने किया निराश

गर्मी बढ़ने के साथ बिजली की मांग भी बढ़ी और इसका असर आंकड़ों में दिखाई दिया। अप्रैल में बिजली और गैस क्षेत्र की ग्रोथ 4.9 फीसदी रही। दूसरी तरफ खनन क्षेत्र का प्रदर्शन कमजोर रहा। इस सेक्टर में 5.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जिससे कुल औद्योगिक उत्पादन पर दबाव पड़ा।

यह पढ़ें: मई में मैन्युफैक्चरिंग PMI 3 महीने के टॉप पर, घरेलू मांग और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च के दम पर बूस्ट

लोगों की खरीदारी और निवेश दोनों बढ़े

रिपोर्ट के मुताबिक, उपभोक्ता सामानों की मांग में भी सुधार देखने को मिला। टिकाऊ और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले दोनों तरह के सामानों की बिक्री बढ़ी, जिससे उपभोक्ता वस्तुओं की ग्रोथ 3.5 फीसदी रही। वहीं कैपिटल गुड्स यानी मशीनरी और औद्योगिक उपकरणों से जुड़े सेक्टर की ग्रोथ 16 फीसदी रही। इसे इस बात का संकेत माना जाता है कि कंपनियां निवेश बढ़ा रही हैं और विस्तार की तैयारी कर रही हैं।

IIP April: आगे क्या हैं चुनौतियां?

नुवामा का कहना है कि आने वाले कुछ महीनों में औद्योगिक उत्पादन को पिछले साल के कमजोर आधार का फायदा मिल सकता है, इसलिए आंकड़े बेहतर दिख सकते हैं। लेकिन चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। दुनिया के कई हिस्सों में सप्लाई चेन की दिक्कतें बनी हुई हैं। कच्चे माल की कीमतें भी ऊंची हैं, जिससे कंपनियों की लागत बढ़ रही है। इसके अलावा अल नीनो और कमजोर मानसून का खतरा भी बना हुआ है। अगर बारिश कम हुई तो कृषि पर असर पड़ सकता है और खाद्य महंगाई बढ़ सकती है। इसका असर उद्योगों और उपभोक्ताओं दोनों पर पड़ेगा।

यह पढ़ें: मई में UPI लेनदेन ने बनाया नया रिकॉर्ड, ₹30 लाख करोड़ के करीब पहुंची ट्रांजैक्शन वैल्यू

निर्यात भी नहीं दे रहा ज्यादा सहारा

रिपोर्ट में कहा गया है कि रुपये में कमजोरी के बावजूद भारत का माल निर्यात उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ रहा है। वैश्विक मांग अभी भी कमजोर बनी हुई है, जिसकी वजह से निर्यात क्षेत्र से ज्यादा मदद नहीं मिल रही। नुवामा का मानना है कि उद्योगों में लंबे समय तक मजबूत तेजी तभी देखने को मिलेगी, जब वैश्विक हालात बेहतर हों, सप्लाई चेन की परेशानियां कम हों और कंपनियों पर लागत का दबाव घटे।

Advertisement
First Published - June 2, 2026 | 10:57 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement