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मई में मैन्युफैक्चरिंग PMI 3 महीने के टॉप पर, घरेलू मांग और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च के दम पर बूस्ट

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मजबूत घरेलू मांग, इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं और नए ऑर्डरों की बदौलत मई में भारत के विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में तेजी आई।

Last Updated- June 01, 2026 | 1:14 PM IST
India Manufacturing PMI may 2026
प्रतीकात्मक फोटो

Manufacturing PMI May 2026: मजबूत घरेलू मांग, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और नए ऑर्डरों में बढ़ोतरी के चलते मई में भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गतिविधियां तीन महीने के हाई पर पहुंच गईं। हालांकि, इस दौरान लागत और महंगाई का दबाव भी बना रहा। यह जानकारी सोमवार को जारी HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई सर्वे में सामने आई।

सीजनली एडजस्टेड एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (Manufacturing PMI) मई में बढ़कर 55.0 पर पहुंच गया, जो अप्रैल में 54.7 था। यह लगातार सेक्टर में विस्तार का संकेत देता है और पिछले तीन महीनों में सबसे मजबूत सुधार को दर्शाता है। PMI नए ऑर्डर, उत्पादन, रोजगार, सप्लायर डिलीवरी समय और कच्चे माल के स्टॉक जैसे प्रमुख संकेतकों के आधार पर तैयार किया जाता है। 50 से ऊपर का स्तर गतिविधियों में विस्तार और 50 से नीचे का स्तर गिरावट का संकेत माना जाता है।

सर्वे के अनुसार, मई में कंपनियों को फरवरी के बाद सबसे तेज गति से नए ऑर्डर मिले और उत्पादन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। इंडस्ट्रीने इसके पीछे मजबूत मांग, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट और नए कारोबार को प्रमुख कारण बताया।

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एचएसबीसी की चीफ इकॉनमिस्ट (इंडिया) प्रांजुल भंडारी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच कंपनियां संभावित जोखिमों को देखते हुए अतिरिक्त स्टॉक तैयार कर रही हैं। इससे उत्पादन, खरीदारी गतिविधियों और तैयार माल के भंडार में तेजी देखने को मिली है। सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि घरेलू बाजार ने मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ को सबसे अधिक समर्थन दिया, जबकि निर्यात ऑर्डरों में बढ़ोतरी की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही।

दूसरी ओर, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा, ईंधन, कच्चे माल और परिवहन लागत पर दबाव बना रहा। कंपनियों ने इन क्षेत्रों में खर्च बढ़ने की बात कही। भंडारी के अनुसार, इनपुट लागत में महंगाई पिछले महीने की तुलना में कुछ कम हुई है, लेकिन तैयार उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार और तेज़ी से घटी है। इससे कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

लागत बढ़ने के बावजूद कंपनियों ने मई में कच्चे माल की खरीद बढ़ाई। खरीदारी की रफ्तार तीन महीने के उच्च स्तर पर रही और यह लॉन्गटर्म औसत से भी बेहतर रही। इसके पीछे एहतियात के तौर पर अतिरिक्त स्टॉक तैयार करने की रणनीति रही।

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नई भर्तियों की रफ्तार धीमी!

उत्पादन बढ़ने के साथ रोजगार जेनरेशन भी जारी रहा। हालांकि, नई भर्तियों की रफ्तार अप्रैल की तुलना में कुछ धीमी रही, लेकिन कुल मिलाकर रोजगार में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई।

भविष्य को लेकर इंडस्ट्री का भरोसा भी मजबूत बना हुआ है। कंपनियों को उम्मीद है कि साल के आगे के महीनों में लागत का दबाव कम होगा। मजबूत ऑर्डर बुक और विज्ञापन गतिविधियों ने भी कारोबारी आशावाद को समर्थन दिया। एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई को एसएंडपी ग्लोबल द्वारा देशभर की करीब 400 मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के खरीद प्रबंधकों से मिले जवाबों के आधार पर तैयार किया जाता है।

एजेंसी इनपुट के साथ

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First Published - June 1, 2026 | 1:14 PM IST

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