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अब इंटरनेशनल ट्रेड में भारतीय ‘रुपये’ का बढ़ेगा दबदबा! RBI उठाने जा रहा ये 3 कदम

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RBI ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रुपये के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए नए कदमों का ऐलान किया

Last Updated- October 01, 2025 | 12:01 PM IST
Indian Rupee

भारत का रुपया अब सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी अपनी ताकत दिखाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। बुधवार को MPC मीटिंग में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि भारतीय रुपये (INR) का वैश्विक इस्तेमाल बढ़ाने के लिए कई अहम कदम उठाए जा रहे हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि भारत के व्यापारिक लेन-देन में विदेशी मुद्रा पर निर्भरता कम हो और रुपये का इस्तेमाल अधिक हो। इससे न केवल भारत का रुपया मजबूत होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारतीय कंपनियों को भी सुविधा मिलेगी, लेन-देन आसान होंगे और वैश्विक बाजार में भारत की वित्तीय स्थिरता और आर्थिक शक्ति को और मजबूती मिलेगी। RBI ने यह भी संकेत दिया कि ये प्रयास क्रमिक और सतत होंगे, ताकि रुपये का अंतरराष्ट्रीयकरण धीरे-धीरे और मजबूती से हो सके, और भारत की मुद्रा को वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद विकल्प बनाया जा सके।

RBI ने कौन-कौन से नए कदम प्रस्तावित किए हैं?

RBI ने इसके लिए तीन नए कदम प्रस्तावित किए हैं। पहला, AD बैंक को अनुमति दी जाएगी कि वे भूटान, नेपाल और श्रीलंका के गैर-निवासियों को भारतीय रुपये में ऋण दे सकें, ताकि सीमा पार व्यापार आसान हो और लेन-देन रुपये में हो सके।

दूसरा, भारत के मुख्य व्यापारिक देशों की मुद्राओं के लिए पारदर्शी रेफरेंस रेट तय किया जाएगा, जिससे रुपये में लेन-देन करना सरल और स्पष्ट हो जाएगा।

तीसरा, SRVA (Special Rupee Vostro Account) बैलेंस का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा और इन्हें कॉर्पोरेट बॉन्ड और कमर्शियल पेपर्स में निवेश करने की अनुमति दी जाएगी। इससे भारतीय रुपये के अंतरराष्ट्रीय इस्तेमाल को और मजबूती मिलेगी।

ये कदम रुपये को मजबूत बनाने में कैसे मदद करेंगे?

गवर्नर ने कहा कि ये कदम भारत के व्यापार और वित्तीय स्थिरता दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इनसे भारत का रुपया अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगा, व्यापार में सुविधा बढ़ेगी और विदेशी मुद्रा पर निर्भरता कम होगी। RBI इस दिशा में और भी कदम उठाता रहेगा ताकि रुपये का वैश्विक इस्तेमाल बढ़ाया जा सके।

विदेशी सेक्टर और रुपया का हाल क्या है?

RBI ने कहा कि भारत का विदेशी सेक्टर मजबूत है और देश अपनी विदेश से जुड़ी वित्तीय जिम्मेदारियों को आसानी से पूरा कर सकता है। हालांकि, रुपया थोड़ा कमजोर हुआ और समय-समय पर उतार-चढ़ाव देखा गया। RBI ने स्पष्ट किया कि रुपये की चाल पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर उचित कदम उठाए जाएंगे ताकि मुद्रा स्थिर रहे और विदेशी लेनदेन प्रभावित न हों।

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First Published - October 1, 2025 | 11:55 AM IST

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