CPI Inflation: देश में महंगाई एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही है। मई 2026 में खुदरा महंगाई दर (CPI) बढ़कर 3.93 फीसदी पर पहुंच गई, जो अप्रैल में 3.48 फीसदी थी। यानी सिर्फ एक महीने में महंगाई करीब 0.45 फीसदी बढ़ गई। हालांकि यह आंकड़ा अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4 फीसदी के लक्ष्य से थोड़ा नीचे है, लेकिन इसमें आई तेजी ने बाजार और अर्थशास्त्रियों का ध्यान खींचा है।
सेंट्रम ब्रोकरेज की रिपोर्ट के मुताबिक, महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों के दाम और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी रही। रिपोर्ट का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन आने वाले महीनों में मौसम और कच्चे तेल की कीमतें महंगाई की दिशा तय करेंगी।
मई में खाद्य महंगाई बढ़कर 4.78 फीसदी हो गई, जो अप्रैल में 4.20 फीसदी थी। सब्जियों के दाम बढ़ने से महंगाई पर सबसे ज्यादा असर पड़ा। टमाटर की महंगाई दर 35.3 फीसदी से बढ़कर 48.4 फीसदी पहुंच गई। अदरक के दामों में भी जोरदार तेजी रही और इसकी महंगाई 14.4 फीसदी से बढ़कर 32.5 फीसदी हो गई। हालांकि आलू अभी भी सस्ता बना हुआ है और इसके दाम सालाना आधार पर 23.7 फीसदी नीचे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल खाद्य कीमतों में जो बड़ी गिरावट देखने को मिली थी, उसका असर अब खत्म हो रहा है। ऐसे में आने वाले महीनों में और ज्यादा खाद्य वस्तुएं महंगी हो सकती हैं।
15 से 25 मई के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल मिलाकर करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी। इसका असर अब महंगाई के आंकड़ों में दिखने लगा है। परिवहन महंगाई अप्रैल में लगभग शून्य थी, जो मई में बढ़कर 1.75 फीसदी हो गई। माल ढुलाई सेवाओं की महंगाई 7.63 फीसदी तक पहुंच गई है। इसका मतलब है कि ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ रही है, जिसका असर आने वाले दिनों में दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
रिपोर्ट में एक दिलचस्प बात यह भी सामने आई है कि सोना और चांदी की बढ़ती कीमतें भी महंगाई बढ़ाने में योगदान दे रही हैं। व्यक्तिगत देखभाल और अन्य वस्तुओं की श्रेणी में महंगाई 18.46 फीसदी पर बनी हुई है। चांदी के आभूषणों की महंगाई 155 फीसदी से ज्यादा और सोना, हीरा तथा प्लैटिनम से जुड़े उत्पादों की महंगाई 40 फीसदी से ऊपर बनी हुई है। ब्रोकरेज का कहना है कि कीमती धातुओं पर आयात शुल्क बढ़ने का असर अभी भी बाजार में दिखाई दे रहा है।
अगर आपको बाहर खाना पसंद है तो आपके लिए भी खर्च बढ़ सकता है। रेस्तरां और होटल सेवाओं की महंगाई अप्रैल के 4.2 फीसदी से बढ़कर मई में 5.75 फीसदी हो गई। विशेषज्ञों का कहना है कि कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई में कमी और बढ़ी हुई लागत के कारण रेस्तरां संचालकों पर दबाव बढ़ा है, जिसका असर ग्राहकों तक पहुंच रहा है।
हालांकि महंगाई बढ़ी है, लेकिन कुछ ऐसे संकेत भी हैं जो आने वाले महीनों में राहत दे सकते हैं। जून की शुरुआत में देश के जलाशयों में पानी का स्तर सामान्य से बेहतर रहा है। टमाटर, प्याज और आलू की आवक भी महीने-दर-महीने 5 से 6 फीसदी बढ़ी है। इसके अलावा मौसम विभाग (IMD) ने अगले दो हफ्तों में भीषण गर्मी कम रहने का अनुमान लगाया है। इन वजहों से खाद्य महंगाई पर कुछ हद तक नियंत्रण रहने की उम्मीद है।
सेंट्रम ब्रोकरेज की सबसे बड़ी चिंता मानसून को लेकर है। मौसम विभाग के दूसरे अनुमान के मुताबिक, 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। रिपोर्ट के अनुसार सामान्य बारिश के मुकाबले सिर्फ 90 फीसदी बारिश होने का अनुमान है और कमजोर मानसून की संभावना 60 फीसदी तक बताई गई है। इसके साथ ही एल नीनो की स्थिति बनने के संकेत भी मिल रहे हैं, जिससे खेती और खाद्य उत्पादन प्रभावित हो सकता है। दूसरी तरफ पश्चिम एशिया में तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। अगर तेल महंगा रहता है तो इसका असर ईंधन, परिवहन और रोजमर्रा की कई वस्तुओं पर पड़ सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल महंगाई RBI के लक्ष्य के आसपास है और कोर महंगाई भी नियंत्रण में दिखाई दे रही है। इसलिए अगस्त की मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों में बदलाव की संभावना कम है। हालांकि अगर खाद्य महंगाई, ईंधन कीमतें और परिवहन लागत लगातार बढ़ती हैं और महंगाई RBI की ऊपरी सीमा की तरफ बढ़ती है, तो अक्टूबर में केंद्रीय बैंक रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी पर विचार कर सकता है। सेंट्रम ब्रोकरेज का अनुमान है कि पूरे वित्त वर्ष 2026-27 में खुदरा महंगाई औसतन 5.1 फीसदी रह सकती है। यानी आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव पूरी तरह खत्म होने वाला नहीं है।