केंद्र सरकार ने बीमा क्षेत्र में बड़ा सुधार करते हुए विदेशी निवेश से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय ने शनिवार को अधिसूचना जारी कर बीमा कंपनियों में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी FDI की अनुमति दे दी है। यह निवेश ऑटोमैटिक रूट के तहत होगा, यानी कंपनियों को पहले से सरकारी मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी।
सरकार के इस फैसले का मतलब है कि अब विदेशी कंपनियां भारत की बीमा कंपनियों में पूरी हिस्सेदारी रख सकती हैं। हालांकि इसके लिए बीमा नियामक संस्था IRDAI यानी भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण की मंजूरी और जांच जरूरी होगी।
वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में साफ किया है कि किसी भी भारतीय बीमा कंपनी की कुल चुकता पूंजी में 100 प्रतिशत तक विदेशी निवेश की इजाजत होगी, लेकिन यह निवेश IRDAI के नियमों और शर्तों के तहत ही किया जा सकेगा।
इस फैसले से पहले बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा 74 प्रतिशत थी। अब इसे बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे विदेशी कंपनियों के लिए भारत का बाजार और ज्यादा आकर्षक बन गया है।
हालांकि, सभी संस्थानों पर यह नियम एक जैसा लागू नहीं होगा। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC में विदेशी निवेश की सीमा 20 प्रतिशत ही रखी गई है। वहीं बीमा से जुड़े बिचौलियों यानी इंश्योरेंस इंटरमीडियरी में पहले से ही 100 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति बनी हुई है।
दरअसल, यह बदलाव “सबका बीमा, सबकी रक्षा” विधेयक 2025 के तहत किया गया है। इस बिल को दिसंबर 2025 में संसद की मंजूरी मिल चुकी थी और बाद में राष्ट्रपति की सहमति भी मिल गई थी। इसके बाद अब सरकार ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर इसे लागू कर दिया है।
जारी अधिसूचना के मुताबिक, विदेशी निवेश में पोर्टफोलियो निवेशक भी शामिल होंगे। यानी अब विदेशी संस्थाएं और निवेशक पूरी हिस्सेदारी तक निवेश कर सकते हैं। इससे बीमा कंपनियों को विस्तार के लिए ज्यादा संसाधन मिलेंगे और नई तकनीकों व सेवाओं को अपनाने में भी मदद मिलेगी।
हालांकि, सरकार ने इस छूट के साथ एक अहम शर्त भी जोड़ी है। जिन बीमा कंपनियों में विदेशी निवेश होगा, उनमें कम से कम एक शीर्ष पद पर भारतीय नागरिक का होना जरूरी रहेगा। यह पद कंपनी के चेयरपर्सन, मैनेजिंग डायरेक्टर या मुख्य कार्यकारी अधिकारी में से कोई एक हो सकता है। साथ ही वह व्यक्ति भारत का निवासी भी होना चाहिए। इस नियम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कंपनी के प्रमुख निर्णयों में भारतीय नेतृत्व की भूमिका बनी रहे।
इससे पहले सरकार ने साल 2020 में बीमा इंटरमीडियरी कंपनियों के लिए 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दी थी। वहीं, देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी में 20 प्रतिशत तक विदेशी निवेश की इजाजत दी गई थी। एलआईसी में विदेशी निवेश उसके विशेष कानून के तहत तय नियमों के अनुसार ही होगा।