facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

बीमा सेक्टर में बड़ा धमाका! अब 100% FDI को मंजूरी, विदेशी कंपनियों की एंट्री आसान

Advertisement

सरकार ने बीमा क्षेत्र में 100% FDI की मंजूरी देकर विदेशी निवेश के लिए रास्ता खोल दिया, लेकिन भारतीय नेतृत्व की शर्त बरकरार रखी।

Last Updated- May 03, 2026 | 9:57 AM IST
FDI
Representative image

केंद्र सरकार ने बीमा क्षेत्र में बड़ा सुधार करते हुए विदेशी निवेश से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय ने शनिवार को अधिसूचना जारी कर बीमा कंपनियों में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी FDI की अनुमति दे दी है। यह निवेश ऑटोमैटिक रूट के तहत होगा, यानी कंपनियों को पहले से सरकारी मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी।

सरकार के इस फैसले का मतलब है कि अब विदेशी कंपनियां भारत की बीमा कंपनियों में पूरी हिस्सेदारी रख सकती हैं। हालांकि इसके लिए बीमा नियामक संस्था IRDAI यानी भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण की मंजूरी और जांच जरूरी होगी।

वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में साफ किया है कि किसी भी भारतीय बीमा कंपनी की कुल चुकता पूंजी में 100 प्रतिशत तक विदेशी निवेश की इजाजत होगी, लेकिन यह निवेश IRDAI के नियमों और शर्तों के तहत ही किया जा सकेगा।

इस फैसले से पहले बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा 74 प्रतिशत थी। अब इसे बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे विदेशी कंपनियों के लिए भारत का बाजार और ज्यादा आकर्षक बन गया है।

हालांकि, सभी संस्थानों पर यह नियम एक जैसा लागू नहीं होगा। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC में विदेशी निवेश की सीमा 20 प्रतिशत ही रखी गई है। वहीं बीमा से जुड़े बिचौलियों यानी इंश्योरेंस इंटरमीडियरी में पहले से ही 100 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति बनी हुई है।

दरअसल, यह बदलाव “सबका बीमा, सबकी रक्षा” विधेयक 2025 के तहत किया गया है। इस बिल को दिसंबर 2025 में संसद की मंजूरी मिल चुकी थी और बाद में राष्ट्रपति की सहमति भी मिल गई थी। इसके बाद अब सरकार ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर इसे लागू कर दिया है।

जारी अधिसूचना के मुताबिक, विदेशी निवेश में पोर्टफोलियो निवेशक भी शामिल होंगे। यानी अब विदेशी संस्थाएं और निवेशक पूरी हिस्सेदारी तक निवेश कर सकते हैं। इससे बीमा कंपनियों को विस्तार के लिए ज्यादा संसाधन मिलेंगे और नई तकनीकों व सेवाओं को अपनाने में भी मदद मिलेगी।

हालांकि, सरकार ने इस छूट के साथ एक अहम शर्त भी जोड़ी है। जिन बीमा कंपनियों में विदेशी निवेश होगा, उनमें कम से कम एक शीर्ष पद पर भारतीय नागरिक का होना जरूरी रहेगा। यह पद कंपनी के चेयरपर्सन, मैनेजिंग डायरेक्टर या मुख्य कार्यकारी अधिकारी में से कोई एक हो सकता है। साथ ही वह व्यक्ति भारत का निवासी भी होना चाहिए। इस नियम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कंपनी के प्रमुख निर्णयों में भारतीय नेतृत्व की भूमिका बनी रहे।

इससे पहले सरकार ने साल 2020 में बीमा इंटरमीडियरी कंपनियों के लिए 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दी थी। वहीं, देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी में 20 प्रतिशत तक विदेशी निवेश की इजाजत दी गई थी। एलआईसी में विदेशी निवेश उसके विशेष कानून के तहत तय नियमों के अनुसार ही होगा।

Advertisement
First Published - May 3, 2026 | 9:57 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement