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बाजार पर मॉनसून के प्रभाव का अंदाजा लगाना अभी जल्दबाजी

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Last Updated- April 11, 2023 | 10:45 PM IST
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भले ही अगले कुछ महीनों के दौरान भारत में मॉनसून की चाल को लेकर एजेंसियों की अलग-अलग राय है, लेकिन विश्लेषकों को भरोसा है कि मौजूदा समय में मौसम संबंधित जो अनुमान जताए जा रहे हैं, उनका बाजार पर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि उनका मानना है कि यह कहना जल्दबाजी होगा कि क्या अल नीनो की वजह से असामान्य मॉनसून से अल्पावधि से मध्यावधि में बाजार धारणा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

जियोजित फाइनैंशियल सर्विसेज में वरिष्ठ उपाध्यक्ष गौरांग शाह ने कहा, ‘ये महज शुरुआती अनुमान हैं और हमारे पास एक महीने में मौसम भविष्यवक्ताओं से नई जानकारियां उपलब्ध होंगी। मौजूदा खबरों के आधार पर यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इससे बाजार धारणा प्रभावित होगी।’

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, भारत में इस साल जून और सितंबर के बीच 96 प्रतिशत लॉन्ग-पीरियड एवरेज (LPA) के साथ मॉनसून सामान्य रहने का अनुमान है। विभाग ने यह भी कहा है कि अल नीनो का प्रभाव मॉनसून सीजन के बाद के हिस्से में महसूस किया जा सकता है। ऐतिहासिक तौर पर अल नीनो वाले वर्षों में 60 प्रतिशत समय में मॉनसून सामान्य रहा।

दूसरी तरफ, मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली निजी एजेंसी स्काइमेट ने 94 प्रतिशत एलपीए के साथ इस साल सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है।

अक्सर, यदि बारिश 90 से 95 प्रतिशत एलपीए के बीच रहती है तो इसे ‘सामान्य से कम’ की श्रेणी में रखा जाता है।

हाल ही में मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के विश्लेषकों ने लिखा है, ‘इस साल अप्रैल महीने में वर्षा का अनुमान आत्मविश्वास बढ़ाता नहीं दिख रहा है। पिछले पांच वर्षों के दौरान हुई वास्तविक बारिश स्काईमेट की पहली भविष्यवाणी की तुलना में या तो बहुत अधिक या कम रही है। यह अंतर ऐसे था कि साल 2018 में 9.4 प्रतिशत कम बारिश हुई और साल 2019 में 18.2 प्रतिशत ज्यादा वर्षा हुई। इस तरह औसतन वास्तविक बारिश स्काईमेट के अप्रैल अनुमानों की तुलना में 4.6 प्रतिशत अधिक रही है।’

जानकारों ने कहा कि वर्षा की मात्रा और इसका समय फसलों की बोआई, उत्पादन और कीमतों को महत्त्वपूर्ण रूप से प्रभावित करेगा।

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर के अनुसार हालांकि जलाशयों का स्तर अभी ठीक है। ऐसे में जून 2023 में मॉनसून में मामूली देरी बहुत चुनौतीपूर्ण नहीं हो सकती है।

नायर ने कहा, ‘अगर इस साल मॉनसून सामान्य से कम हो जाता है तो हम वित्त वर्ष 2023-24 के लिए हमारे सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 6 प्रतिशत की वृद्धि के अनुमान में 50 आधार अंकों तक की गिरावट की उम्मीद कर सकते हैं।’

रोजमर्रा के सामान (FMCG) और वाहन क्षेत्रों के लिए जियोजित के शाह को लगता है कि अगर मॉनसून के दौरान बारिश अपेक्षाकृत कम होती है तो यहां होने वाले खर्च प्रभावित होंगे।

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First Published - April 11, 2023 | 7:43 PM IST

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