सरकार को पश्चिम एशिया के मद्देनजर आपातकालीन ऋण सहायता योजना के लिए 1.71 करोड़ रुपये के आवेदन प्राप्त हुए हैं। सरकार ने यह योजना एक सप्ताह पहले शुरू की थी। यह योजना उच्चतर लागत और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के कारण ज्यादा नकदी मदद की मांग को उजागर करती है। सरकार को 29 मई तक आपातकालीन ऋण गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) 5.0 के तहत 2,62,800 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
अधिकारियों ने पश्चिम एशिया संकट पर एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग के दौरान सोमवार को बताया कि बैंकों ने पहले ही 35,194 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए हैं और 15,720 करोड़ रुपये की गारंटी जारी की गई है। केंद्रीय कैबिनेट ने 5 मई को यह योजना मंजूर कर दी थी। यह योजना बैंकों को मौजूदा ऋण सीमा के 20 प्रतिशत के बराबर अतिरिक्त कार्यशील पूंजी प्रदान करने की अनुमति देती है।
इसका लक्ष्य कुल 2.55 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण मुहैया कराना (जिसमें एअरलाइंस के लिए 5,000 करोड़ रुपये शामिल ) है। अधिकारियों ने बताया कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) से करीब 75-76 प्रतिशत आवेदन प्राप्त हुए हैं। अधिकारियों को अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि ईरान युद्ध के कारण इस क्षेत्र में तनावग्रस्त या गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों में वृद्धि हुई है।
ऋण सहायता कार्यक्रम के साथ-साथ सरकार ने उर्वरक आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा उपलब्धता और जहाजरानी पर संघर्ष के प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से कई आपातकालीन उपायों की रूपरेखा तैयार की है।
सरकार ने खाद्य सुरक्षा पर कहा कि खाद्यान्न भंडार निर्धारित बफर मानकों से काफी अधिक है। केंद्रीय भंडार में गेहूं का भंडार वर्तमान में 513 लाख टन है जबकि 1 जुलाई तक बफर के लिए 275 लाख टन की आवश्यकता थी। चावल का भंडार 397 लाख टन है और धान से लगभग 298 लाख टन चावल की वृद्धि होने की उम्मीद है।
उपभोक्ता मामलों के विभाग ने कहा कि घरेलू दलहन उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इससे आयात पर निर्भरता कम हुई है। दलहन का आयात पिछले वर्ष के 73 लाख टन से घटकर 2025-26 में लगभग 60 लाख टन रह गया है जबकि सरकार के पास दलहन का बफर भंडार एक वर्ष पहले के 18 लाख टन से बढ़कर 43 लाख टन हो गया है। अधिकारियों ने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद अनाज, दलहन, खाद्य तेल, प्याज और आलू सहित प्रमुख खाद्य पदार्थों की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।