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मॉनिटरी पॉलिसी को सक्रिय रूप से मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने वाली होना चाहिए : RBI गवर्नर दास

गवर्नर ने कहा, ‘‘ हमने नीतिगत दर पर रोक बरकरार रखी है। अब तक 2.50 प्रतिशत की वृद्धि वित्तीय प्रणाली के जरिए अब भी काम कर रही है...।’’

Last Updated- October 20, 2023 | 12:23 PM IST
बैंकिंग साख: मुद्रास्फीति नियंत्रण का वादा पूरा करेंगे दास!, Das will fulfill the promise of controlling inflation!

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (RBI Governor Shakitkanta Das) ने शुक्रवार को इस बात पर जोर दिया कि मौद्रिक नीति को सक्रिय रूप से मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने वाली होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके ऐसा होने से ही जुलाई में 7.44 प्रतिशत के उच्चतम स्तर से मुद्रास्फीति में गिरावट सुचारू रूप से जारी रही।

‘कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2023’ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मूल्य स्थिरता तथा वित्तीय स्थिरता एक-दूसरे के पूरक हैं और आरबीआई ने दोनों को कुशलतापूर्वक प्रबंधित करने का प्रयास किया है। सब्जियों तथा ईंधन की कीमतों में नरमी के कारण सितंबर में सालाना आधार पर खुदरा मुद्रास्फीति घटकर तीन महीने के निचले स्तर 5.02 प्रतिशत आ गई।

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति अगस्त में 6.83 प्रतिशत और सितंबर 2022 में 7.41 प्रतिशत थी। जुलाई में मुद्रास्फीति 7.44 प्रतिशत के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए रिजर्व बैंक ने इस साल फरवरी में नीतिगत दर में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। इससे पहले, पिछले साल मई से लेकर कुल छह बार में रेपो दर में 2.50 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी।

यह भी पढ़ें : Market LIVE: वित्त वर्ष 2023 में RBI की बैलेंस शीट घटकर GDP का 22.5% रह गई : आरबीआई गवर्नर

गवर्नर ने कहा, ‘‘ हमने नीतिगत दर पर रोक बरकरार रखी है। अब तक 2.50 प्रतिशत की वृद्धि वित्तीय प्रणाली के जरिए अब भी काम कर रही है…।’’ उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान से मौद्रिक नीति का असर तेजी से और प्रभावी रूप से दिखने लगा है।

दास ने इस बात पर भी जोर दिया कि मौद्रिक नीति हमेशा चुनौतीपूर्ण रहती है और इसमें आत्मसंतुष्ट होने की कोई बात नहीं है। गवर्नर ने अपने भाषण में कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अब तीन चुनौतियों मुद्रास्फीति, धीमी वृद्धि और वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिम का सामना कर रही है।

घरेलू वित्तीय क्षेत्र के संबंध में उन्होंने कहा कि भारतीय बैंक तनाव की स्थिति के दौरान भी न्यूनतम पूंजी आवश्यकताओं को बनाए रखने में सक्षम होंगे। दास ने कहा कि भारत वैश्विक वृद्धि का नया इंजन बनने के लिए तैयार है और मार्च 2024 में समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष में देश की जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।

First Published - October 20, 2023 | 12:23 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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