बिजली उत्पादक एनटीपीसी लिमिटेड जल्द ही स्वदेशी प्रेशराइज्ड हेवी वॉटर रिएक्टर (पीएचडब्ल्यूआर) तकनीक पर आधारित 1,400 मेगावाट के परमाणु ऊर्जा संयंत्र की स्थापना के लिए परमाणु ऊर्जा आयोग (एईसी) से शीघ्र मंजूरी मांगेगी। वरिष्ठ अधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि परियोजना के लिए व्यवहार्यता अध्ययन पूरा हो गया है। कंपनी एईसी की मंजूरी मिलने के बाद भूमि का अधिग्रहण करने की योजना बना रही है।
उन्होंने कहा, ‘एनटीपीसी 14 राज्यों में हरेक राज्य में 700 मेगावाट की कम से कम दो इकाइयों की स्थापना की योजना बना रही है और अनुमानित लागत लगभग 20 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट आती है।’ उन्होंने बताया कि कंपनी 2032 तक छह वर्षों में परियोजना को चालू करने के लिए 28,000 करोड़ रुपये खर्च कर सकती है।
एनटीपीसी को हाल ही में बिहार सरकार से राज्य के बांका जिले में ऐसे आकार के परमाणु ऊर्जा संयंत्र को स्थापित करने की मंजूरी मिली है। अधिकारी ने बताया कि तापीय बिजली संयंत्र की तुलना में परमाणु संयंत्र के लिए पानी की जरूरत काफी अधिक होती है। एक परमाणु रिएक्टर को प्रति यूनिट 4.5-5 लीटर पानी की आवश्यकता होती है जबकि थर्मल प्लांट को प्रति यूनिट 3 लीटर पानी की जरूरत होती है।
परमाणु परियोजना स्थापित करने की प्रक्रिया जटिल होती है और इसमें कई मंजूरियों की आवश्यकता होती है। संयंत्र स्थापित करने की इच्छुक कोई भी कंपनी चयनित स्थल की सिटिंग सहमति और साइट मूल्यांकन रिपोर्ट के लिए एईआरबी को आवेदन करती है। एईआरबी बाहरी घटनाओं के मुकाबले इंजीनियरिंग समाधानों की व्यवहार्यता, नींव की स्थिरता और आपातकालीन उपायों के कार्यान्वयन की समीक्षा करता है। परमाणु स्थल व्यवहार्यता अध्ययन में भूमि, जल और बुनियादी ढांचे का विस्तृत मूल्यांकन शामिल होता है और इसमें 1-2 साल लग जाते हैं। एनटीपीसी का लक्ष्य 2047 तक 30 गीगावाट परमाणु क्षमता हासिल करना है, जो उस वर्ष भारत की 100 गीगावाट परमाणु क्षमता में महत्त्वपूर्ण योगदान देगा।
सरकार ने केंद्रीय बजट 2025-26 में स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (एसएमआर) के अनुसंधान और विकास पर केंद्रित परमाणु ऊर्जा मिशन शुरू किया। सरकार ने 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए और चालू एसएमआर विकसित करने के लिए 20,000 करोड़ रुपये आबंटित किए हैं।
भारत ने पिछले महीने 500 मेगावाट के फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) के प्रोटोटाइप की पहली क्रिटिकैलिटी हासिल की। क्रिटिकैलिटी वह बिंदु है जिस पर नियंत्रित परमाणु विखंडन श्रृंखला प्रतिक्रिया शुरू होती है। इससे परमाणु ईंधन संसाधनों का उपयोग बढ़ता है। इससे भारत अपने सीमित यूरेनियम भंडार से अधिक ऊर्जा निकालने में सक्षम होता है जबकि भविष्य में थोरियम के बड़े पैमाने पर उपयोग के लिए भी तैयारी करता है। इस उपलब्धि के साथ भारत अपने तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की पूरी क्षमता हासिल करने के करीब भी पहुंच गया है।