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महंगा क्रूड बिगाड़ सकता है भारत की ग्रोथ और महंगाई का संतुलन

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$120 के पार क्रूड, FY27 में GDP गिरने और महंगाई बढ़ने का खतरा

Last Updated- May 01, 2026 | 9:12 AM IST
India GDP Growth
Representational Image

पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच तेल के दाम आसमान छूने और ईंधन आपूर्ति में लंबे समय तक व्यवधान की बढ़ती आशंका से वित्त वर्ष 2027 में भारत की आर्थिक वृद्धि एवं मुद्रास्फीति का संतुलन और बिगड़ सकता है। ईरान युद्ध का कोई समाधान नहीं निकलने के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत गुरुवार को चार साल के उच्चतम स्तर यानी 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। हालांकि, बाद में यह फिर थोड़ा नीचे आ गई।

कच्चे तेल की कीमतों में यह उछाल अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी नौ सैनिक नाकेबंदी तब तक जारी रह सकती है जब तक ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम नहीं छोड़ देता।

अप्रैल में भारतीय कच्चे तेल (क्रूड बास्केट) की औसत कीमत में मामूली वृद्धि हुई और यह मार्च में दर्ज 113.5 डॉलर प्रति बैरल की तुलना में 114.25 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। ईवाई इंडिया में मुख्य नीति सलाहकार डी के श्रीवास्तव ने कहा कि अगर पश्चिम एशियाई संकट जारी रहता है तो भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं।

श्रीवास्तव ने कहा,‘अगर वित्त वर्ष 2027 में क्रूड बास्केट की औसत कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल रहती है तो भारत के वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर लगभग 6 प्रतिशत तक गिर सकती है और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर 6 प्रतिशत हो सकती है। नीतिगत हस्तक्षेपों की गुंजाइश सीमित दिख रही है मगर तब भी रीपो दर में वृद्धि और कच्चे तेल की आपूर्ति के स्रोत बढ़ाने पर विचार करने की जरूरत है।’

वित्त मंत्रालय ने बुधवार को जारी अपनी मासिक आर्थिक रिपोर्ट (एमईआर) में कहा कि भारत के लिए मुद्रास्फीति, राजकोषीय और बाह्य घाटा बढ़ने का खतरा है और आर्थिक वृद्धि दर नीचे सरकने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसमें कहा गया है,‘हालांकि, आर्थिक वृद्धि दर मजबूत बनाए रखने के प्रयास के साथ-साथ नीतिगत उपायों से मध्यम अवधि में राजकोषीय और बाह्य स्थिरता बेहतर रहने की उम्मीद है।’

भारतीय तेल विपणन कंपनियों ने अभी तक ईंधन की खुदरा कीमतों में वृद्धि नहीं की है और सरकार भी कहती रही है कि उसकी ऐसी कोई योजना नहीं है मगर एमईआर ने संकेत दिया कि यह सिलसिला लंबे समय तक नहीं चल सकता। रिपोर्ट में कहा गया,‘कुछ देशों ने खुदरा कीमतें बढ़ानी शुरू कर दी है। कुछ देशों ने अभी तक ऐसा नहीं किया है मगर आने वाले समय में उन्हें भी कीमतें बढ़ानी होंगी। आपूर्ति में व्यवधान के दौरान मांग में कमी आनी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर देशों को ऊर्जा आपूर्ति के लिए बहुत अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी।’

कच्चे तेल की कीमतों में प्रत्येक 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी से भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि लगभग 15 आधार अंक तक कम हो सकती है और घरेलू उत्पाद की कीमतों पर इसका पूरा प्रभाव पड़ने से मुद्रास्फीति 30 आधार अंक तक बढ़ सकती है। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने बुधवार को अपने आर्थिक पूर्वानुमान अद्यतन किए और एडीबी ने एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि और मुद्रास्फीति पर पश्चिम एशिया संकट के प्रभाव के लिए नए अनुमान जारी किए।

एडीबी के अनुसार अगर 2026 में तेल के दाम लगभग 96 डॉलर प्रति बैरल के औसत स्तर पर रहे और ऊर्जा आपूर्ति में लगातार व्यवधान के साथ बाजार के हालात में धीमी गति से सुधार हुआ तो दक्षिण एशिया में वृद्धि दर वर्ष 2025 में दर्ज 6.8 प्रतिशत से घटकर 2026 में 5.7 प्रतिशत तक रह सकती है। एडीबी के अनुसार मुद्रास्फीति 2025 के 2.9 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 7.6 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। 2026 में तेल की कीमतें लगभग 150 डॉलर प्रति बैरल के औसत पर रहने के अनुमान के बीच दक्षिण एशिया में इसके प्रभाव काफी अधिक दिखेगा।

इन हालात में वृद्धि दर 2025 के 6.8 प्रतिशत से घटकर 2026 में 4.9 प्रतिशत रहने जबकि मुद्रास्फीति 2025 के 2.9 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 10.9 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। 2026 में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 82 डॉलर प्रति बैरल पर रहने के अनुमान को ध्यान में रखते हुए आईएमएफ ने घरेलू मांग और मौजूदा रफ्तार की वजह से वित्त वर्ष 2027 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

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First Published - May 1, 2026 | 9:12 AM IST

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