वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में संभावित तेजी को लेकर एक बड़ी चिंता सामने आई है। ईवाई इंडिया (EY India) की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर वित्त वर्ष 2027 में भारतीय क्रूड बास्केट की औसत कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती है, तो इसका सीधा असर भारत की आर्थिक वृद्धि और महंगाई दोनों पर देखने को मिल सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक ऐसी स्थिति में देश की जीडीपी वृद्धि दर घटकर लगभग 6 प्रतिशत तक आ सकती है। वहीं महंगाई दर भी बढ़कर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ऊपरी सीमा यानी 6 प्रतिशत के आसपास पहुंच सकती है। इसका मतलब है कि आम लोगों की जेब पर भी महंगाई का दबाव बढ़ सकता है और आर्थिक रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है।
ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डीके श्रीवास्तव ने कहा कि मौजूदा हालात में नीति निर्माताओं के पास सीमित विकल्प हैं, लेकिन फिर भी कुछ कदम उठाना जरूरी होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार और रिजर्व बैंक को मिलकर नीति स्तर पर ऐसे फैसले लेने होंगे जिससे अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले नकारात्मक असर को कम किया जा सके। इसमें रेपो रेट में बढ़ोतरी जैसे कदमों पर भी विचार किया जा सकता है।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अपने कच्चे तेल के आयात के स्रोतों में विविधता लाने की जरूरत है। अगर पश्चिम एशिया में जारी तनाव लंबे समय तक चलता है, तो कच्चे तेल की आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है और कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। ऐसे में भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के अनुमान के अनुसार 2026 की पहली तिमाही में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 81 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है, लेकिन दूसरी तिमाही तक यह बढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। हालांकि आगे स्थिति कैसी रहती है, यह पूरी तरह वैश्विक भू-राजनीतिक हालात पर निर्भर करेगा।
अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के अनुमान की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। वहीं एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने इसे 6.9 प्रतिशत और विश्व बैंक ने 6.6 प्रतिशत रहने की संभावना जताई है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.9 प्रतिशत रखा है, जो वित्त वर्ष 2026 के 7.6 प्रतिशत के अनुमान से थोड़ा कम है। इसके साथ ही RBI ने महंगाई दर 4.6 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान भी दिया है।
ईवाई की रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में चल रहा संकट उम्मीद से ज्यादा लंबा खिंच सकता है। अगर यह स्थिति बनी रहती है तो वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य होने में काफी समय लग सकता है। इस कारण भारत में कच्चे तेल की कीमतें औसतन 95 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर जा सकती हैं।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नकारात्मक परिस्थितियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक औसत से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। यानी अगर वैश्विक विकास दर धीमी भी रहती है, तब भी भारत की विकास दर उससे लगभग दोगुनी बनी रह सकती है।
-पीटीआई इनपुट के साथ