प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन खपत में संयम रखने की अपील के कुछ दिन बाद ही तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने शुक्रवार को गैर-ब्रांडेड पेट्रोल और डीजल की कीमतों में औसतन 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। पिछले चार साल में पहली बार कीमतों में यह बढ़ोतरी हुई है। वहीं, शहरी गैस वितरण कंपनियों ने सीएनजी के दाम में 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की।
अब दिल्ली में गैर-ब्रांडेड पेट्रोल की कीमत 97.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) ने दिल्ली में सीएनजी की कीमत 79.09 रुपये प्रति किलो कर दी जबकि महानगर गैस ने मुंबई में इसे 84 रुपये प्रति किलो कर दिया। यह बदलाव कंपनियों के बढ़ते नुकसान और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच किया गया है।
यह मामूली वृद्धि तेल कंपनियों के नुकसान को कुछ हद तक कम कर सकती है, लेकिन मई से खुदरा महंगाई बढ़ सकती है और इसका असर उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा। इक्रा लिमिटेड में वरिष्ठ उपाध्यक्ष (कॉरपोरेट रेटिंग्स) प्रशांत वशिष्ठ का कहना है, ‘पेट्रोल और डीजल के रिटेल दाम में 3 रुपये प्रति लीटर की मामूली बढ़ोतरी, तेल विपणन कंपनियों को सीमित राहत देती है।
इक्रा का अनुमान है कि 105-110 डॉलर प्रति बैरल कच्चे तेल की कीमत पर और पिछले 10 साल के औसत वाहन ईंधन मार्जिन को ध्यान में रखते हुए, तेल कंपनियों को रोजाना लगभग 500 करोड़ रुपये का नुकसान होता है, भले ही ईंधन की कीमतें बढ़ा दी गई हों।’
सरकार ने पिछले हफ्ते ईंधन की कीमत बढ़ाने के संकेत दिए थे क्योंकि सरकारी ओएमसी पेट्रोल और डीजल को कम दाम पर बेच रही थीं जबकि कच्चे तेल की खरीद महंगी थी।
पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक होने के बावजूद तेल कंपनियों ने डीजल-पेट्रोल की कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं किया।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 12 मई को कहा कि तेल मार्केटिंग कंपनियां रोजाना 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाकर पेट्रोल और डीजल बेच रही हैं। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में ओएमसी की वसूली 2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ सकती है जबकि नुकसान 1 लाख करोड़ रुपये तक जा सकता है।
सरकार ने मार्च के अंत में तेल मार्केटिंग कंपनियों को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क 10 रुपये प्रति लीटर घटाया था।
भारतीय स्टेट बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस बार ईंधन कीमतों में वृद्धि से ओएमसी के नुकसान में 52,700 करोड़ रुपये की राहत मिल सकती है, जो वित्त वर्ष 2027 में अनुमानित कुल नुकसान का 15 प्रतिशत है।