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निजी क्षेत्र ने संभाली कमान: FY26 में नए निवेश में 70% हिस्सेदारी, कुल योजनाएं ₹41 लाख करोड़ के पार

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वित्त वर्ष 2026 में 58.25 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश के साथ निजी क्षेत्र अग्रणी रहा। महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश निवेश के लिए सबसे पसंदीदा राज्य बनकर उभरे हैं

Last Updated- April 26, 2026 | 10:12 PM IST
Investments Portfolio
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

वित्त वर्ष 2025-26 में हुए नए पूंजी निवेश का नेतृत्व निजी क्षेत्र के हाथों में रहा है। नई परियोजनाओं में कई वर्षों बाद उसका हिस्सा 70 फीसदी से ऊपर निकल गया। इसकी वजह थी नए निवेश की प्रतिबद्धताओं में 51.5 फीसदी की वृद्धि जो वर्ष भर में करीब 41 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। जबकि सरकारी पूंजीगत व्यय केवल एक फीसदी बढ़ा।

जनवरी-मार्च तिमाही जो पश्चिम एशिया के युद्ध से प्रभावित रही, उसमें भारत की नई निवेश योजनाएं आधी होकर 8.6 लाख करोड़ रुपये रह गईं। इससे पहले की तीन तिमाहियों में यह आंकड़ा 16 लाख करोड़ रुपये से अधिक था। निवेश पर नजर रखने वाली फर्म प्रोजेक्ट्स टुडे के अनुसार इसके बावजूद वित्त वर्ष 26 में नई परियोजनाओं का मूल्य 32 फीसदी बढ़कर 58.25 लाख करोड़ रुपये तक जा पहुंचा जो वित्त वर्ष 25 के 44.15 लाख करोड़ रुपये से अधिक था।

नई परियोजनाओं की तादाद भी 38 फीसदी बढ़कर वित्त वर्ष 25 के 11,720 से वित्त वर्ष 26 में 16,247 हो गई। इसमें विनिर्माण क्षेत्र ने सबसे मजबूत 47 फीसदी की वृद्धि दर्ज की। नई विनिर्माण योजनाओं का मूल्य 58.3 फीसदी उछलकर करीब 17.24 लाख करोड़ रुपये तक जा पहुंचा। एक वर्ष पहले यह 10.9 लाख करोड़ रुपये था। इसमें बुनियादी धातुएं, रसायन, मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों ने अहम भूमिका निभाई। ओडिशा के ढेंकेनाल में वेदांत का 1.28 लाख करोड़ रुपये का एल्युमीनियम स्मेल्टर वित्त वर्ष 26 में घोषित सबसे बड़ी एकल परियोजना थी।

घरेलू निजी निवेशकों के प्रस्तावित निवेश 40.7 प्रतिशत बढ़कर 34.06 लाख करोड़ रुपये हो गए, वहीं विदेशी निवेशकों की योजनाएं दोगुनी से भी अधिक बढ़ीं। यह 144.05 प्रतिशत बढ़कर 6.91 लाख करोड़ रुपये तक जा पहुंचीं। कुल मिलाकर निजी पूंजीगत व्यय योजनाएं नए निवेशों का 70.34 प्रतिशत रहीं, जो वित्त वर्ष 25 के 61.23 प्रतिशत से अधिक है।

नई सरकारी परियोजनाओं का मूल्य, जिसे पिछले कुछ वर्षों से अर्थव्यवस्था को गति देने और निजी पूंजी को आकर्षित करने के लिए बढ़ाया गया था, वह17.28 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो वित्त वर्ष 25 के लगभग 17.12 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा अधिक है। यह वृद्धि मुख्यतः राज्यों द्वारा संचालित थी, जिनके प्रस्तावित व्यय 3 प्रतिशत बढ़कर लगभग 8.67 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गए।

यह केंद्र के 8.61 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश से थोड़ा अधिक है। वित्त वर्ष 26 में नए निवेश में सालाना आधार पर मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। निजी क्षेत्र की भागीदारी, विनिर्माण में उल्लेखनीय सुधार और नवीकरणीय ऊर्जा में निरंतर वृद्धि ने इसकी अगुआई की है।

वर्ष 2000 से ही निवेश परियोजनाओं पर नजर रखने वाली रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 26 ने नए निवेश में वर्ष-दर-वर्ष मजबूत वृद्धि दर्ज की, जिसका नेतृत्व निजी क्षेत्र की भागीदारी, विनिर्माण में उल्लेखनीय सुधार और नवीकरणीय ऊर्जा में सतत गति ने किया।

निजी क्षेत्र की 82 प्रतिशत नई परियोजनाएं मेगा निवेश परियोजनाएं थीं जिनकी कीमत 1,000 करोड़ या उससे अधिक थी। हालांकि इस वर्ष का परिदृश्य कई वैश्विक चुनौतियों के कारण सतर्क हो गया है और वित्त वर्ष 27 में फिर से मजबूत सार्वजनिक क्षेत्र के पूंजीगत व्यय की आवश्यकता पड़ सकती है क्योंकि अनिश्चितता के बीच मेगा परियोजनाएं शुरू करना विशेष रूप से जोखिमपूर्ण हो सकता है।

प्रोजेक्ट्स टुडे के सीईओ और निदेशक शशिकांत हेगड़े ने कहा, ‘वर्ष के अंत में नए निवेश में नरमी भू-राजनीतिक अनिश्चितता और ऊंचे तेल मूल्यों के बीच मुद्रास्फीति की आशंका से हुई है और यह वित्त वर्ष 27 के शुरुआती महीनों में निवेश रुझान को प्रभावित कर सकती है। ऐसी अनिश्चितताएं निजी निवेश निर्णयों को सार्वजनिक खर्च की तुलना में अधिक तेजी से प्रभावित करती हैं।’

प्रोजेक्ट्स टुडे के सीईओ और निदेशक शशिकांत हेगड़े ने कहा, ‘तात्कालिक परिदृश्य तेज और व्यापक निवेश वृद्धि की बजाय धीमी और अधिक चयनात्मक वृद्धि की ओर इशारा करता है। वित्त वर्ष 27 में समग्र निवेश गति बनाए रखने के लिए मजबूत सार्वजनिक क्षेत्र के पूंजीगत व्यय की आवश्यकता हो सकती है।’

वित्त वर्ष 26 में निवेशकों द्वारा पसंद किए गए राज्यों में बदलाव देखने को मिले, हालांकि महाराष्ट्र शीर्ष पर बना रहा और अपने हिस्से को बढ़ाकर 11.05 लाख करोड़ रुपये कर लिया, जो वित्त वर्ष 25 के 7.94 लाख करोड़ रुपये से अधिक था।

आंध्र प्रदेश वित्त वर्ष 25 में पांचवें स्थान से  दूसरे स्थान पर पहुंच गया। राजस्थान ने तीसरा स्थान बरकरार रखा, हालांकि कुल निवेश में उसका हिस्सा 10.54 प्रतिशत से घटकर 9.12 प्रतिशत हो गया, जबकि गुजरात चौथे स्थान पर खिसक गया। ओडिशा एक स्थान ऊपर चढ़कर पांचवें स्थान पर आ गया, जबकि कर्नाटक दो स्थान गिरकर छठे पर फिसल गया।

मध्य प्रदेश सातवें पसंदीदा निवेश गंतव्य के रूप में बना रहा। तेलंगाना और उत्तर प्रदेश क्रमशः आठवें और नौवें स्थान पर रहे। तमिलनाडु ने शीर्ष 10 राज्यों  में आया जबकि छत्तीसगढ़ दसवें स्थान से बारहवें स्थान पर चला गया।

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First Published - April 26, 2026 | 10:12 PM IST

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